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जी , सुना क्या ?? दिल का ख्याल सबका अधिकार: दिव्यांगजनों तक कब पहुँचेगी सुलभ हृदय जांच?

विश्व हृदय दिवस: दिव्यांगजनों तक सुलभ हृदय जांच पहुँचाना भी जरूरी।

नियमित जांच, संतुलित आहार और क्षमता के अनुरूप शारीरिक गतिविधि से कम किया जा सकता है हृदय रोग का खतरा

अजमेर। विश्व हृदय दिवस हर वर्ष 29 सितंबर को हृदय रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस अवसर पर दुनियाभर में लोगों को समय पर स्वास्थ्य जांच कराने और हृदय-सुरक्षित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विश्व हृदय महासंघ के अनुसार हृदय तथा रक्तवाहिका संबंधी बीमारियां दुनिया में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू सेवन और शराब के हानिकारक उपयोग को हृदय रोग एवं स्ट्रोक के प्रमुख व्यवहारगत जोखिमों में शामिल किया है। उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ रक्त शर्करा एवं कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और वायु प्रदूषण भी खतरा बढ़ा सकते हैं।

दिव्यांगजनों के लिए विशेष चुनौती

दिव्यांगजनों, विशेषकर सीमित गतिशीलता, सेरेब्रल पाल्सी अथवा बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए नियमित व्यायाम, अस्पताल तक पहुंच और लक्षणों को स्पष्ट रूप से बताना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई बार अस्पतालों में रैंप, व्हीलचेयर, सुलभ जांच उपकरण, सांकेतिक भाषा की सुविधा अथवा सरल भाषा में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं होती। इससे समय पर जांच और उपचार प्रभावित हो सकता है।

शुभदा शक्ति का मानना है कि हृदय स्वास्थ्य अभियान तभी वास्तव में सफल होगा, जब स्वास्थ्य सेवाएं प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुलभ हों। अस्पतालों और जांच शिविरों में barrier-free प्रवेश, प्रशिक्षित सहायक, accessible diagnostic equipment तथा दिव्यांग-अनुकूल संवाद की व्यवस्था आवश्यक है।

छोटे बदलाव बन सकते हैं सुरक्षा कवच

विशेषज्ञों के अनुसार रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच करानी चाहिए। भोजन में नमक, अत्यधिक चीनी और तले हुए खाद्य पदार्थों को सीमित करना, तंबाकू से दूरी रखना तथा पर्याप्त नींद लेना लाभकारी हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक और मधुमेह की रोकथाम एवं प्रबंधन में सहायक है।

दिव्यांगजन अपनी क्षमता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार wheelchair exercises, assisted movement, stretching या अन्य अनुकूलित गतिविधियां अपना सकते हैं। किसी भी नई exercise routine को शुरू करने से पहले चिकित्सक अथवा physiotherapist की सलाह लेना जरूरी है।

सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक पसीना, अचानक कमजोरी या बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार में समय न गंवाकर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

विशेष संदेश: स्वस्थ हृदय हर व्यक्ति का अधिकार है—स्वास्थ्य व्यवस्था ऐसी हो, जहां दिव्यांगता जांच और उपचार के रास्ते में बाधा न बने।

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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