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UGC का बड़ा फैसला: दिव्यांग छात्रों के लिए कॉलेजों में बढ़ेंगी सुविधाएं

दिव्यांग छात्रों के लिए UGC का बड़ा कदम, फ्लेक्सिबल असाइनमेंट, Assistive Devices, ई-लर्निंग और करियर सपोर्ट पर जोर

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले दिव्यांग छात्रों के लिए समावेशी और सुविधाजनक शैक्षणिक माहौल तैयार करने पर जोर दिया है। बौद्धिक दिव्यांगता (Intellectual Disability), ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (Autism Spectrum Disorder) और विशिष्ट सीखने की कठिनाइयों (Specific Learning Disabilities) वाले छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संस्थानों के लिए विभिन्न सहायता उपायों पर जोर दिया गया है।

इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांग छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने के दौरान उनकी जरूरत के अनुसार शैक्षणिक, तकनीकी, आर्थिक और व्यक्तिगत सहायता मिल सके।

पढ़ाई के तरीके में भी होगा बदलाव

दिव्यांग छात्रों की अलग-अलग सीखने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अधिक लचीला शैक्षणिक वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया है।

इसके तहत छात्रों को फ्लेक्सिबल असाइनमेंट, लिखने में सहायता देने वाले उपकरण, उपयुक्त अध्ययन सामग्री और आवश्यकता के अनुसार पढ़ाई के बीच ब्रेक जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

इसका उद्देश्य छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम करना और उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार पढ़ाई करने का अवसर देना है।

शिक्षकों और स्टाफ को दिया जाएगा ओरिएंटेशन

UGC ने शिक्षकों और संस्थान के अन्य कर्मचारियों को दिव्यांग छात्रों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने पर भी जोर दिया है।

इसके लिए ओरिएंटेशन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं, ताकि शिक्षक और स्टाफ छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकें और उनके साथ उचित व्यवहार कर सकें।

इसके अलावा अन्य छात्रों के बीच भी जागरूकता बढ़ाने के लिए वीडियो और अन्य माध्यमों से कार्यक्रम आयोजित किए जाने पर जोर दिया गया है।

जरूरत के अनुसार बढ़ाया जा सकता है स्टाफ

दिव्यांग छात्रों को बेहतर व्यक्तिगत सहायता उपलब्ध कराने के लिए संस्थानों में Staff-to-Student Ratio पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।

जहां आवश्यकता हो, वहां छात्रों की संख्या और उनकी सहायता जरूरतों के अनुसार अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था की जा सकती है।

ई-लर्निंग और घर से पढ़ाई का विकल्प

ऐसे छात्र जिनके लिए नियमित रूप से कॉलेज परिसर पहुंचना मुश्किल है, उनके लिए ई-लर्निंग और डिस्टेंस एजुकेशन जैसे विकल्प महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

इसके साथ ही आवश्यकता के अनुसार रेजिडेंशियल ट्रेनिंग और अन्य वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्थाओं का भी सहारा लिया जा सकता है।

स्कॉलरशिप से लेकर करियर तक सहायता

दिव्यांग छात्रों को आर्थिक और करियर संबंधी सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत पात्र छात्रों को स्कॉलरशिप, फीस में छूट और केंद्र एवं राज्य सरकार की वित्तीय योजनाओं से जोड़ने की दिशा में संस्थानों को काम करना होगा।

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इसके अलावा छात्रों के लिए करियर काउंसलिंग, कौशल विकास और प्लेसमेंट सहायता को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

अलग-अलग दिव्यांगताओं के लिए अलग सहायता

UGC की गाइडलाइंस में दिव्यांग छात्रों की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार Assistive Devices और अन्य सुविधाओं की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

1. शारीरिक दिव्यांगता वाले छात्र

ऐसे छात्रों के लिए कैंपस में आने-जाने, बैठने और Mobility से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा पन्ने पलटने, लिखने, कीबोर्ड इस्तेमाल करने, अध्ययन सामग्री तक पहुंच बनाने और कंप्यूटर व इंटरनेट जैसी ICT सुविधाओं के इस्तेमाल में आवश्यक सहायता दी जा सकती है।

2. सेरेब्रल पाल्सी वाले छात्र

 

सेरेब्रल पाल्सी वाले छात्रों के लिए रोजमर्रा के कार्यों, बैठने-उठने और व्यक्तिगत देखभाल में सहायता की जरूरत को ध्यान में रखा गया है।

उनके शरीर के सही पोस्चर और आराम के लिए विशेष फर्नीचर उपलब्ध कराने के साथ-साथ लिखने, टाइप करने, पन्ने पलटने और संचार में सहायता की व्यवस्था की जा सकती है।

3. कुष्ठ रोग से ठीक हुए छात्र

कुष्ठ रोग से ठीक हुए छात्रों को लिखने, टाइप करने और अध्ययन सामग्री संभालने में आवश्यक सहायता देने पर जोर दिया गया है।

देखने, Mobility और बातचीत से जुड़ी चुनौतियों के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। कक्षा में बैठने की उपयुक्त व्यवस्था और ICT टूल्स तक पहुंच भी महत्वपूर्ण होगी।

4. एसिड अटैक सर्वाइवर्स

एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए बातचीत, हाथों की गतिविधियों और अन्य दैनिक कार्यों में जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

दृष्टि संबंधी परेशानी होने पर अतिरिक्त सहायता, कक्षा में उपयुक्त बैठने की व्यवस्था और कैंपस की सुविधाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।

5. बौनेपन और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी वाले छात्र

बौनेपन वाले छात्रों के लिए उनकी लंबाई और जरूरत के अनुसार बैठने की व्यवस्था, Mobility तथा ICT सुविधाओं में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

वहीं मस्कुलर डिस्ट्रॉफी वाले छात्रों के लिए बैठने, चलने-फिरने, एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने और संचार में आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विशेष सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

समावेशी शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

UGC की ये पहल उच्च शिक्षा में दिव्यांग छात्रों के लिए अधिक समावेशी, सुलभ और समान अवसर वाला वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दिव्यांग छात्रों की जरूरतों को केवल शैक्षणिक स्तर तक सीमित न रखते हुए सहायक उपकरण, कैंपस सुविधाओं, आर्थिक सहायता, कौशल विकास, करियर काउंसलिंग और रोजगार से जोड़ना उनकी उच्च शिक्षा और भविष्य के लिए अहम साबित हो सकता है।

Shubhda Shakti की खास बात:
“समान शिक्षा, समान अवसर और सम्मान के साथ आगे बढ़ेंगे दिव्यांग विद्यार्थी।”

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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