हँसी के बादशाह फिर साथ! ‘साराभाई’ और ‘खिचड़ी’ की यादों से ‘चुम्बक’ तक, दिलों से जुड़ी इस तिकड़ी का सफर
जिनके बनाए किरदार कभी घर का हिस्सा लगते थे, वही पुराने साथी अब एक नई महफिल में साथ हैं—आतिश कपाड़िया, जेडी मजेठिया और देवेन भोजानी।
शुभदा शक्ति | मनोरंजन डेस्क
कुछ सीरियल खत्म हो जाते हैं, लेकिन उनसे जुड़ी शामें यादों में बसी रहती हैं। परिवार के साथ टीवी के सामने बैठना, किसी किरदार की बात पर एक साथ हँस पड़ना और अगले दिन उन्हीं मजेदार संवादों को दोहराना… ‘खिचड़ी’ और ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ जैसे कार्यक्रमों की यादों में यही अपनापन छिपा है।
इन कार्यक्रमों का नाम आते ही केवल किरदार याद नहीं आते, घर में गूँजने वाले ठहाके भी याद आते हैं। अब उसी हँसी की दुनिया से जुड़े आतिश कपाड़िया, जेडी मजेठिया और देवेन भोजानी Netflix की ‘चुम्बक’ में साथ आए हैं। पुराने दर्शकों के लिए यह अपने पसंदीदा कहानीकारों से दोबारा मिलने जैसा अवसर है।

हँसी के इन बादशाहों की खासियत थी अपनापन
‘खिचड़ी’ की अनोखी दुनिया हो या ‘साराभाई’ की घरेलू नोकझोंक—इन कार्यक्रमों में किरदारों की अपनी बोली, अपनी आदतें और अपनी मासूम उलझनें थीं। देखते-देखते दर्शक उन्हें पहचानने लगे, उनके अगले जवाब का इंतजार करने लगे। यही वह जुड़ाव है, जो किसी कार्यक्रम को वर्षों बाद भी यादगार बनाए रखता है।
‘चुम्बक’ में इस पुरानी साझेदारी की जिम्मेदारियाँ अलग-अलग हैं। आतिश कपाड़िया लेखक और निर्देशक हैं, जेडी और आतिश निर्माता हैं, जबकि देवेन भोजानी अभिनय करते नजर आते हैं। ‘साराभाई’ में देवेन निर्देशन से भी जुड़े थे। इस तरह लेखन, निर्माण और अभिनय का अनुभव एक बार फिर एक ही परियोजना में साथ आया है।
कॉलेज की दोस्ती से शुरू हुई कहानियों की साझेदारी

आतिश और जेडी का साथ कॉलेज के दिनों से जुड़ा है। गुजराती रंगमंच के प्रति साझा लगाव ने उन्हें ‘हैट्स ऑफ प्रोडक्शंस’ तक पहुँचाया। ‘थैंक यू कोकिला’ और ‘एक बीजाने गमता रहिए’ जैसे नाटकों से आगे बढ़कर उनकी यात्रा टेलीविजन तक पहुँची। मंच से शुरू हुआ यह रिश्ता समय के साथ दर्शकों के घरों और उनकी यादों का हिस्सा बन गया।
आतिश कपाड़िया: जिनकी कलम ने मुस्कुराने के बहाने दिए
आतिश के सफर में ‘एक महल हो सपनों का’, ‘खिचड़ी’, ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ और ‘बा बहू और बेबी’ जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। उनके काम में हास्य के साथ रिश्तों की भावनात्मक दुनिया भी दिखाई देती है।
सिनेमा से उनका जुड़ाव भी उल्लेखनीय है। उनके नाटक ‘आंधलो पाटो’ पर ‘आँखें’ बनी, जबकि ‘आवजो व्हाला फरी मलीशु’ का रूपांतरण ‘वक्त: द रेस अगेंस्ट टाइम’ बना। अलग-अलग माध्यमों में कहानियाँ कहने का यह अनुभव उनके रचनात्मक सफर को विस्तार देता है।
जेडी मजेठिया: पर्दे के ‘हिमांशु’, पर्दे के पीछे कई कहानियाँ
‘खिचड़ी’ के हिमांशु को याद करने वाले दर्शकों के लिए जेडी का चेहरा अपने आप में एक मुस्कान है। निर्माता के रूप में भी उनकी लंबी यात्रा रही है। उनके और हैट्स ऑफ प्रोडक्शंस के काम में ‘इंस्टेंट खिचड़ी’, ‘जसुबेन जयंतीलाल जोशी की जॉइंट फैमिली’, ‘बड़ी दूर से आए हैं’, ‘वागले की दुनिया’ और ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इस सफर में परिवार, पड़ोस और रोजमर्रा की जिंदगी बार-बार कहानियों के केंद्र में आए हैं।
देवेन भोजानी: एक चेहरा, यादें अनेक
‘देख भाई देख’, ‘ऑफिस ऑफिस’ और ‘बा बहू और बेबी’—देवेन भोजानी का सफर कई यादगार कार्यक्रमों से होकर गुजरा है। ‘गट्टू’ के रूप में उनका अभिनय उनकी खास पहचान बना। वहीं, ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ में निर्देशन की जिम्मेदारी ने कैमरे के पीछे उनकी प्रतिभा को भी सामने रखा। ‘चुम्बक’ में पुराने रचनात्मक साथियों के साथ उनकी मौजूदगी इस मुलाकात को और खास बनाती है।
नई महफिल में परिचित चेहरों का साथ

पुराने पसंदीदा चेहरे, नए कलाकारों का साथ
‘चुम्बक’ में ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ से जुड़े परिचित नामों के साथ कई अन्य कलाकार भी नजर आते हैं।
‘साराभाई’ से इनका है पुराना नाता
- सुमीत राघवन: ‘साराभाई’ में साहिल साराभाई बने थे। अब ‘चुम्बक’ की कलाकार टोली में शामिल हैं।
- देवेन भोजानी: ‘साराभाई’ में दुष्यंत का किरदार निभाने के साथ निर्देशन से भी जुड़े रहे। ‘चुम्बक’ में वे अभिनय कर रहे हैं।
- आतिश कपाड़िया और जेडी मजेठिया: ‘साराभाई’ के पीछे की रचनात्मक टीम के प्रमुख नाम। ‘चुम्बक’ में आतिश ने लेखन और निर्देशन संभाला है, जबकि दोनों इसके निर्माता हैं।
‘चुम्बक’ की टोली में ये कलाकार भी हैं
- नीना गुप्ता
- सुमीत व्यास
- मानसी पारेख
- अर्जुन बिजलानी
- हेली शाह
- संदीपा धर
- अमायरा दस्तूर
- अनंत वी. जोशी
- दिलनाज़ ईरानी
- अतुल कुमार
पुराने साथियों और इन कलाकारों के मेल से ‘चुम्बक’ की नई महफिल सजी है—जिसमें पड़ोस और रिश्तों की दुनिया है, और दर्शकों के लिए अपने पसंदीदा चेहरों से फिर मिलने की खुशी।

कहानी का आनंद दर्शकों के लिए छोड़ते हुए, इस मुलाकात की खुशी का जिक्र जरूर बनता है। जिन नामों के साथ बचपन, कॉलेज के दिन या परिवार के साथ बिताई शामें जुड़ी हों, उन्हें फिर साथ देखना अपने आप में खास होता है।
‘चुम्बक’ के बहाने हँसी के पुराने साथियों ने एक नई महफिल सजाई है। और ऐसी महफिलें याद दिलाती हैं कि साथ बैठकर हँसने की खुशी कितनी अनमोल होती है।
आपके घर में ‘खिचड़ी’ और ‘साराभाई’ देखते समय सबसे ज्यादा कौन हँसता था? अपनी वह प्यारी याद और पसंदीदा किरदार कमेंट में बताइए।






