Asian Games 2026: भारतीय बेटियों ने रचा इतिहास, विश्व चैंपियन South Korea को हराकर पहली बार जीता Recurve Team Gold
अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोड की तिकड़ी ने 5-3 से जीता रोमांचक फाइनल; एशियाई खेलों में भारत का इस स्पर्धा में पहला स्वर्ण

आइची-नागोया, जापान। भारतीय महिला तीरंदाजी ने Asian Games 2026 में इतिहास का नया अध्याय लिख दिया है। अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम अनिल मोहोड की भारतीय तिकड़ी ने महिला Recurve Team Final में विश्व चैंपियन South Korea को 5-3 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह Asian Games के इतिहास में भारत का इस स्पर्धा में पहला गोल्ड मेडल है।
44 साल के इंतजार के बाद बदली तस्वीर
South Korea लंबे समय से महिला recurve team archery की सबसे प्रभावशाली ताकतों में रहा है। हालांकि “44 साल की लगातार जीत” कहना सटीक नहीं होगा—Korea ने 1998 से लगातार सात Asian Games titles जीते थे और 1982 के बाद किसी final में नहीं हारा था। भारत की जीत ने इसी लंबे वर्चस्व को समाप्त किया।
इस उपलब्धि को और खास बनाता है कि भारत इससे पहले Asian Games में women’s recurve team final तक भी नहीं पहुंचा था।
सांसें रोक देने वाला फाइनल
फाइनल की शुरुआत से ही मुकाबला बेहद करीबी रहा। पहले set में दोनों टीमों ने 54-54, जबकि दूसरे में 56-56 का समान स्कोर किया। इससे मुकाबला 2-2 की बराबरी पर पहुंच गया।
तीसरे set में भारतीय तीरंदाजों ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन किया। South Korea के 51 के मुकाबले भारत ने 55 अंक हासिल कर 4-2 की बढ़त बना ली।
लेकिन असली रोमांच आखिरी set में आया। कुमकुम मोहोड ने अंतिम arrow पर 10 लगाया। कीर्ति के एक arrow को review के बाद 9 माना गया, जिससे चौथा set 54-54 से बराबर रहा और भारत को जरूरी एक point मिल गया। Final score 5-3 रहा—और इतिहास बन गया।
China को हराकर पहुंचे थे Final में
भारत ने इससे पहले semifinal में China को 5-1 से हराकर पहली बार Asian Games women’s recurve team final में जगह बनाई थी।
पिछले Asian Games में भारतीय महिला recurve team ने bronze जीता था। इस बार टीम ने एक कदम नहीं, बल्कि बड़ी छलांग लगाते हुए सीधे स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
शुभदा शक्ति का नजरिया: अवसर मिले तो बेटियां इतिहास बदल सकती हैं
यह जीत सिर्फ एक gold medal की कहानी नहीं है। यह आत्मविश्वास, अवसर, प्रशिक्षण और दबाव में खुद पर भरोसा रखने की कहानी भी है।
अंकिता, कीर्ति और कुमकुम की उपलब्धि उन हजारों बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देख रहे हैं। यही संदेश दिव्यांग खिलाड़ियों सहित हर प्रतिभाशाली युवा पर लागू होता है—क्षमता को अवसर और सही मंच मिले, तो सीमाएं उपलब्धियों का रास्ता नहीं रोक सकतीं।
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शुभदा शक्ति — दिव्यांगों को दुनिया और दुनिया को दिव्यांगों से जोड़ने की एक पहल।






