मेडल जीतने का सपना, चयन में भ्रष्टाचार के आरोप! पैरा खिलाड़ियों ने मांगा इंसाफ
एशियन पैरा गेम्स से पहले भारतीय पैरा निशानेबाजी टीम के चयन पर विवाद; खिलाड़ियों ने 20 प्रतिशत कमीशन मांगने और पक्षपात के आरोप लगाए, पैरालंपिक समिति ने किया खंडन।

शुभदा शक्ति न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट | 11 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली/अजमेर। देश के लिए पदक जीतने का सपना संजोए भारतीय पैरा खिलाड़ियों के सामने एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जापान में 18 से 24 अक्टूबर तक होने वाले एशियन पैरा गेम्स से पहले भारतीय पैरा निशानेबाजी टीम की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। कई खिलाड़ियों ने चयन में पक्षपात, नियमों की अनदेखी और आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
विदाई समारोह में खिलाड़ियों का विरोध
8 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित भारतीय दल के विदाई समारोह के दौरान लगभग दस पैरा निशानेबाजों और प्रशिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों का आरोप है कि बेहतर रैंकिंग और प्रदर्शन के बावजूद कुछ योग्य खिलाड़ियों को टीम में जगह नहीं मिली।
निशानेबाज आकाश और संदीप कुमार ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धियों और निर्धारित मानदंडों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सरकारी पुरस्कार राशि से 20 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप
विवाद का सबसे गंभीर पहलू आर्थिक अनियमितताओं से जुड़ा है। खिलाड़ियों ने भारतीय खेल प्राधिकरण को दिए शिकायत पत्र में आरोप लगाया कि राष्ट्रीय टीम में चयन के बदले सरकारी नकद पुरस्कार राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा मांगा गया।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कोटे के आवंटन, चयन अंकों और समिति के फैसलों में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग भी की।
हालांकि, ये आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं। स्वतंत्र जांच के बिना किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
पैरालंपिक समिति ने आरोपों को नकारा
भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि खिलाड़ियों का चयन निर्धारित मानदंडों और खेल मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया गया है।
विवाद में नाम आने वाले अधिकारी जयप्रकाश नौटियाल ने भी आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि चयन सात सदस्यीय समिति ने किया और आरोप लगाने वाले खिलाड़ियों को अपने दावों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए।
क्या खिलाड़ियों को मिलेगा निष्पक्ष अवसर?
यह विवाद केवल टीम चयन तक सीमित नहीं है। इससे पैरा खेलों में पारदर्शिता, खिलाड़ियों की शिकायतों के समाधान और खेल संस्थाओं की जवाबदेही पर व्यापक सवाल खड़े हुए हैं।
खिलाड़ियों का मनोबल बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि शिकायतों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच हो। साथ ही चयन मानदंड, प्रदर्शन के आंकड़े और निर्णय प्रक्रिया स्पष्ट रूप से सार्वजनिक की जाए।
शुभदा शक्ति का सवाल—प्रतिभा बड़ी या प्रभाव?
शुभदा शक्ति का मानना है कि दिव्यांग खिलाड़ियों को सहानुभूति नहीं, समान अवसर और निष्पक्ष व्यवस्था चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों का चयन केवल योग्यता, प्रदर्शन और निर्धारित नियमों के आधार पर होना चाहिए।
यदि आरोप गलत हैं तो संबंधित अधिकारियों की प्रतिष्ठा सुरक्षित रहनी चाहिए। लेकिन यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो जिम्मेदारी तय होना भी आवश्यक है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब खिलाड़ी देश के लिए पदक जीतने की तैयारी कर रहे हों, तब उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष क्यों करना पड़े?
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