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जी,सुना क्या ?? नेपाल में जलप्रलय! बूढ़ी गंडकी का रौद्र रूप, घर-पुल तबाह, कई लापता।

शुभदा शक्ति न्यूज़ | अंतरराष्ट्रीय समाचार |

11 अक्टूबर 2026

नेपाल में कुदरत का कहर! बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक सैलाब, दर्जनों घर बहे, 5 लापता।

भूस्खलन से नदी का रास्ता रुकने के बाद टूटा पानी का दबाव, पुल और बिजली परियोजना को नुकसान; सेना ने 49 लोगों को बचाया

काठमांडू / अजमेर । नेपाल के गोरखा जिले में रविवार तड़के बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने कई गांवों में भारी तबाही मचा दी। पानी का बहाव इतना तेज था कि नदी किनारे बने दर्जनों मकान बह गए, कई पुल क्षतिग्रस्त हो गए और एक जलविद्युत परियोजना का निर्माण स्थल भी प्रभावित हुआ। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण के अनुसार पांच लोग लापता हैं, जबकि सेना ने 49 लोगों को सुरक्षित निकाला है। अभी किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है

सुबह-सुबह मचा हाहाकार

रविवार सुबह करीब चार बजे गोरखा जिले के चुमनुब्री क्षेत्र में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने लगा। देखते ही देखते तेज बहाव ने सल्लेरी, जगत और आसपास की बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों को घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।प्रारंभिक स्थानीय आकलन के अनुसार करीब 35 से 40 मकान बाढ़ में बह गए। प्रभावित इलाकों में संपर्क मार्ग और पुल टूटने से राहत कार्यों में कठिनाई पैदा हुई है।

आखिर अचानक कैसे आई इतनी भीषण बाढ़?

प्रशासन की शुरुआती जांच के अनुसार चुमनुब्री के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन होने से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया था। इससे पानी अस्थायी रूप से जमा होने लगा। बाद में यह अवरोध टूटने से भारी मात्रा में पानी अचानक निचले इलाकों की ओर बह निकला।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी घटनाओं को भूस्खलन से बने अस्थायी बांध के टूटने से उत्पन्न बाढ़ कहा जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह की बाढ़ अत्यंत खतरनाक होती है, क्योंकि लोगों को सुरक्षित निकलने के लिए बहुत कम समय मिलता है।

सेना ने संभाला मोर्चा, कई जिलों में अलर्ट

नेपाल की सेना और पुलिस राहत-बचाव अभियान में जुटी हैं। हेलीकॉप्टरों की सहायता से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का कार्य किया जा रहा है।

प्रशासन ने गोरखा, तनहूं, चितवन और नवलपरासी सहित नदी के निचले क्षेत्रों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। लोगों से नदी किनारे न जाने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गई है।

हिमालयी क्षेत्रों के लिए गंभीर चेतावनी

नेपाल में बार-बार सामने आ रही ऐसी आपदाएं हिमालयी बस्तियों की सुरक्षा, नदी किनारे निर्माण, भूस्खलन की निगरानी और समय रहते चेतावनी देने वाली प्रणालियों की आवश्यकता को उजागर करती हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी अचानक आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पर्याप्त तैयारी की जा रही है?

इस घटना ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक आपदा को पूरी तरह रोकना भले संभव न हो, लेकिन प्रभावी निगरानी, समय पर चेतावनी और सुरक्षित पुनर्वास से अनेक जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

 

 

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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