पाकिस्तान में आज भी गूंजते हैं ‘जय माता दी’ और ‘जय श्रीराम’ के जयकारे, जानिए 5 प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों की कहानी
हिंगलाज माता की दुर्गम गुफा से लेकर समुद्र किनारे बसे वरुण देव मंदिर तक—पाकिस्तान की धरती पर मौजूद ये प्राचीन धार्मिक स्थल हिंदू आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की सदियों पुरानी कहानी समेटे हुए हैं।
शुभदा शक्ति डेस्क। पाकिस्तान को दुनिया एक इस्लामिक देश के रूप में जानती है, लेकिन इसी सरजमीं पर हिंदू धर्म से जुड़े कई प्राचीन मंदिर और तीर्थस्थल भी मौजूद हैं। इनमें सबसे चर्चित नाम हिंगलाज माता मंदिर का है। बलूचिस्तान के दुर्गम पहाड़ी इलाके में प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थित यह मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। पाकिस्तान सरकार के पुरातत्व विभाग के अनुसार भी हिंगलाज माता मंदिर एक शक्ति पीठ है और यहां सालभर हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। अप्रैल में होने वाली विशेष तीर्थयात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है।
हिंगलाज माता: पाकिस्तान में शक्ति की आराधना

हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु द्वारा माता सती के शरीर के विखंडन के बाद उनका मस्तक हिंगलाज क्षेत्र में गिरा था। यही कारण है कि यह स्थान देवी उपासकों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। खास बात यह भी है कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय में इस स्थान को ‘नानी मंदिर’ के नाम से सम्मान दिया जाता है।
हालांकि पाकिस्तान में तीन शक्तिपीठ होने का दावा विभिन्न धार्मिक सूचियों और परंपराओं में अलग-अलग मिलता है। NDTV की रिपोर्ट में हिंगलाज माता के साथ शिवहरकराय और शारदा पीठ का उल्लेख किया गया है।
कटास राज: भगवान शिव से जुड़ी आस्था

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित कटास राज मंदिर वास्तव में कई मंदिरों का प्राचीन समूह है। इसके बीच स्थित पवित्र सरोवर से एक धार्मिक मान्यता जुड़ी है कि माता सती के वियोग में भगवान शिव की आंख से गिरे आंसू से इसका निर्माण हुआ। NDTV के अनुसार भारतीय श्रद्धालुओं को भी विशेष अवसरों पर यहां दर्शन के लिए वीजा दिए जाते रहे हैं।
पहाड़ की गुफा में कालका देवी

सिंध के अरोड़ क्षेत्र की पहाड़ियों में प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थित कालका देवी गुफा मंदिर भी बेहद दिलचस्प है। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी कालका यहां प्रकट हुई थीं। मंदिर के संबंध में यह लोकमान्यता भी है कि गुफा की दो सुरंगें हिंगलाज माता की दिशा में जाती हैं; इसे ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य के बजाय स्थानीय मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कराची में पंचमुखी हनुमान मंदिर

कराची का श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर पाकिस्तान के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में शामिल है। यहां पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा को श्रद्धालु स्वयंभू मानते हैं। मंदिर की प्राचीनता को लेकर अलग-अलग दावे मिलते हैं; 2019 में जीर्णोद्धार के दौरान यहां मिली कुछ मूर्तियों और कलाकृतियों को प्रारंभिक आकलन में कम से कम लगभग 300 वर्ष पुराना बताया गया था।
समुद्र किनारे वरुण देव मंदिर

कराची के मनौरा द्वीप पर स्थित वरुण देव मंदिर समुद्र और सिंधी हिंदू संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह वरुण देव को समर्पित है और समुद्री यात्राओं तथा नाविक समुदाय से इसकी धार्मिक परंपराएं जुड़ी बताई जाती हैं।
भारत-पाकिस्तान के राजनीतिक संबंध भले ही दशकों से जटिल रहे हों, लेकिन सीमा के उस पार मौजूद ये मंदिर उपमहाद्वीप की उस साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाते हैं जो आधुनिक सीमाओं से कहीं पुरानी है। हिंगलाज की पहाड़ियों से लेकर कराची के समुद्री किनारे तक आज भी ये तीर्थस्थल हिंदू समुदाय की आस्था और सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण केंद्र बने हुए हैं।





