कॉकरोच जनता पार्टी में बड़ी फूट! मनीष ब्रह्मभट्ट ने बनाई CJP-D, अभिजीत दीपके पर ‘आंदोलन से धोखे’ का आरोप

नई दिल्ली। युवाओं, बेरोजगारी और परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में अब बड़ी बगावत सामने आई है। संगठन से जुड़े रहे गुजरात के एक्टिविस्ट मनीष ब्रह्मभट्ट ने अलग होकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ (CJP-D) के गठन का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और संगठन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?
मनीष ब्रह्मभट्ट अहमदाबाद, गुजरात के रहने वाले हैं और CJP से जुड़े आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और पेपर लीक से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए आंदोलन में वह सक्रिय वॉलंटियर के रूप में शामिल थे।
विवाद अगस्त में उस समय बढ़ा, जब ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे। वहां अभिजीत दीपके के घर CJP की कोर टीम की बैठक होने की जानकारी सामने आई थी। ब्रह्मभट्ट का आरोप था कि आंदोलन में सक्रिय रहे कई जमीनी कार्यकर्ताओं को इस बैठक और संगठन के अहम फैसलों से दूर रखा गया। इसके विरोध में दोनों ने प्रदर्शन भी किया और इस दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
क्यों बनाई CJP-D?
3 सितंबर को दिल्ली में मनीष ब्रह्मभट्ट ने CJP-D के गठन की घोषणा की। उनका आरोप है कि जिस आंदोलन को देशभर के छात्रों, युवाओं और वॉलंटियर्स ने खड़ा किया, उसकी सफलता के बाद फैसले कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हो गए।
सबसे बड़ा विवाद CJP की राष्ट्रीय टीम को लेकर है। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि 12 सदस्यीय टीम बनाते समय जमीनी कार्यकर्ताओं से पर्याप्त सलाह नहीं ली गई और इसमें आठ ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिनके आम आदमी पार्टी से संबंध रहे हैं। हालांकि, आठ सदस्यों के AAP से जुड़े होने के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
ब्रह्मभट्ट का आरोप है कि आंदोलन में अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों ने भाग लिया था, लेकिन बाद में संगठन में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उन्होंने महिलाओं, छात्रों और अन्य समुदायों को पर्याप्त जगह नहीं दिए जाने का सवाल भी उठाया है।
CJP-D का मॉडल क्या होगा?
मनीष ब्रह्मभट्ट का दावा है कि नया संगठन अधिक लोकतांत्रिक तरीके से काम करेगा। उनकी योजना प्रत्येक राज्य के स्थानीय आंदोलनकारियों और वॉलंटियर्स में से प्रतिनिधियों को आगे लाने की है, ताकि संगठन की कमान केवल कुछ लोगों के हाथ में न रहे।
उनके मुताबिक, CJP-D का उद्देश्य छात्रों और आम लोगों से जुड़े उन मुद्दों को फिर केंद्र में लाना है, जिनसे मूल आंदोलन की शुरुआत हुई थी।
अभिजीत दीपके ने आरोपों पर क्या कहा?
विवाद का दूसरा पक्ष भी महत्वपूर्ण है। अभिजीत दीपके ने CJP को किसी राजनीतिक दल की ‘बी टीम’ बताए जाने के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अलग-अलग लोग CJP को कभी कांग्रेस तो कभी आम आदमी पार्टी की ‘बी टीम’ बताते हैं, जबकि उनका संगठन छात्रों की ‘ए टीम’ है।
दीपके पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहने की बात स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन उनका कहना है कि अब उनका AAP से कोई संबंध नहीं है। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल और AAP के कुछ नेता CJP के साथ सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए थे। हालांकि, किसी आंदोलन को राजनीतिक नेताओं का समर्थन मिलना या किसी पदाधिकारी का पुराना राजनीतिक संबंध होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संगठन उस पार्टी के निर्देश पर काम कर रहा है।
अब CJP बनाम CJP-D?
जिस CJP ने अपेक्षाकृत कम समय में युवाओं और छात्रों के मुद्दों के जरिए पहचान बनाई, उसके सामने अब आंतरिक असंतोष बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। मनीष ब्रह्मभट्ट की CJP-D जमीनी स्तर पर कितना समर्थन जुटा पाएगी और क्या यह वास्तव में CJP के समानांतर मजबूत संगठन बन सकेगी, इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा।
फिलहाल इतना साफ है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के भीतर शुरू हुआ विवाद अब खुली बगावत और एक नए गुट के गठन तक पहुंच चुका है। साथ ही, दोनों पक्षों के राजनीतिक संबंधों और संगठनात्मक फैसलों से जुड़े दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक उनके स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आते।
— शुभदा शक्ति डेस्क






