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जी, सुना क्या ?? B.P. और Blood Sugar, दिव्यांगजन के लिए कितना बड़ा ख़तरा,कैसे करें बचाव ।

BP और Blood Sugar एक बार बढ़ने पर सामान्य क्यों नहीं होते? दिव्यांगजन के लिए कितना बड़ा खतरा, कैसे करें बचाव

Blood Pressure और Blood Sugar की समस्या आज बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है। अक्सर सवाल उठता है कि एक बार BP या Sugar बढ़ने के बाद दवा क्यों शुरू करनी पड़ती है? रिपोर्ट सामान्य हो जाए तो क्या दवा बंद की जा सकती है? और दिव्यांगजन के लिए Diabetes तथा High BP का खतरा और उसके प्रभाव क्या अलग हो सकते हैं?
इन सवालों को समझना जरूरी है, क्योंकि BP और Diabetes को लंबे समय तक अनियंत्रित छोड़ने पर हृदय, किडनी, आंखों, नसों और मस्तिष्क पर गंभीर असर पड़ सकता है। कुछ जटिलताएं व्यक्ति की पहले से मौजूद दिव्यांगता के साथ उसकी स्वतंत्रता और दैनिक गतिविधियों को और कठिन बना सकती हैं।

पहले समझिए—रिपोर्ट सामान्य होने का मतलब बीमारी खत्म होना नहीं

अगर BP की दवा लेने के बाद ब्लड प्रेशर सामान्य आ रहा है, तो इसका अर्थ यह जरूरी नहीं कि Hypertension समाप्त हो गया। कई मामलों में इसका अर्थ होता है कि उपचार BP को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर रहा है।
इसी तरह Diabetes में दवा, खान-पान और शारीरिक गतिविधि के कारण Blood Sugar नियंत्रित हो सकती है। इसलिए कुछ सामान्य readings देखकर अपनी मर्जी से दवा बंद करना उचित नहीं है।
दवा घटाने, बदलने या बंद करने का फैसला डॉक्टर को व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और जांचों के आधार पर करना चाहिए।

दिव्यांगजन के लिए BP और Diabetes पर विशेष ध्यान क्यों जरूरी?

यह समझना जरूरी है कि दिव्यांगता होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति अस्वस्थ है और न ही हर दिव्यांग व्यक्ति को Diabetes या High BP होगा।
लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक स्वास्थ्य आंकड़े बताते हैं कि दिव्यांग वयस्कों में कुछ chronic diseases अधिक देखी जाती हैं। CDC के अनुसार अमेरिका के आंकड़ों में दिव्यांग वयस्कों में heart disease, stroke और diabetes जैसी बीमारियों का जोखिम अधिक पाया गया है।
इसके पीछे कई परिस्थितियां भूमिका निभा सकती हैं—जैसे पर्याप्त शारीरिक गतिविधि के अवसर न मिलना, accessible exercise facilities की कमी, परिवहन संबंधी कठिनाइयां, नियमित स्वास्थ्य जांच तक पहुंच में बाधाएं या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं।
इसलिए दिव्यांगजन के लिए prevention और नियमित screening को सुलभ बनाना बेहद महत्वपूर्ण है।

चलने-फिरने में कठिनाई वाले दिव्यांगजन

Wheelchair users या mobility impairment वाले कुछ व्यक्तियों के लिए सामान्य walking या exercise programmes उपयुक्त नहीं होते। कम physical activity वजन, cardiovascular health और Type-2 Diabetes के जोखिम को प्रभावित कर सकती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे exercise नहीं कर सकते।
व्यक्ति की क्षमता और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार wheelchair propulsion/rolling, swimming या water-based activity, resistance bands, adapted yoga और अन्य adapted exercises विकल्प हो सकते हैं। CDC भी दिव्यांग वयस्कों के लिए उनकी क्षमता के अनुरूप नियमित physical activity की सलाह देता है।
Exercise शुरू करने से पहले डॉक्टर या physiotherapist से यह समझना चाहिए कि कौन-सी activity सुरक्षित और उपयुक्त है।

दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए Diabetes क्यों विशेष चिंता का विषय?

लंबे समय तक अनियंत्रित Diabetes आंखों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है और diabetic eye disease के कारण vision loss का खतरा बढ़ सकता है।
ऐसे में पहले से low vision या visual impairment वाले व्यक्ति के लिए आंखों की नियमित जांच और Blood Sugar, BP तथा cholesterol का नियंत्रण विशेष महत्व रखता है।
Diabetes वाले व्यक्ति को डॉक्टर द्वारा सुझाए गए अंतराल पर comprehensive/dilated eye examination करानी चाहिए।

Diabetes से पैरों और नसों पर भी पड़ सकता है असर

लंबे समय तक अधिक Blood Sugar शरीर की नसों को नुकसान पहुंचा सकती है, जिसे diabetic neuropathy कहा जाता है।
इससे पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट, दर्द या संवेदना कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार व्यक्ति को पैर में चोट या घाव का पता देर से चलता है।
खराब blood circulation के साथ समस्या गंभीर होने पर infection और गंभीर foot complications का खतरा बढ़ सकता है।
जिन व्यक्तियों को पहले से mobility impairment है, उनके लिए अतिरिक्त nerve damage, balance problems या foot complications दैनिक गतिविधियों और स्वतंत्रता को और प्रभावित कर सकती हैं।
इसलिए पैरों की नियमित जांच, चोट या घाव को नजरअंदाज न करना और healthcare team से foot examination कराना महत्वपूर्ण है।

High BP से Stroke का खतरा—और Stroke स्वयं बन सकता है दिव्यांगता का कारण

अनियंत्रित High Blood Pressure का सबसे गंभीर परिणामों में से एक Stroke है।
Hypertension मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली arteries के block होने या फटने से होने वाले stroke के जोखिम को बढ़ाता है। Stroke के बाद व्यक्ति में चलने-फिरने, बोलने, देखने, निगलने या दूसरी दैनिक गतिविधियों से संबंधित दीर्घकालिक कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
इसीलिए BP नियंत्रण केवल numbers को सामान्य रखने की बात नहीं, बल्कि भविष्य में गंभीर cardiovascular और neurological complications से बचाव का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Diabetes से Kidney पर भी खतरा

Diabetes किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। समय के साथ diabetic kidney disease विकसित हो सकती है।
अगर Diabetes के साथ High BP भी मौजूद है तो दोनों स्थितियों का उचित नियंत्रण और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार Blood Sugar, BP और kidney function की निगरानी करानी चाहिए।

बौद्धिक या संज्ञानात्मक दिव्यांगता में Caregiver की भूमिका

कुछ intellectual, developmental या cognitive disabilities वाले व्यक्तियों को दवा का समय याद रखने, Blood Sugar जांचने, डॉक्टर की instructions समझने या बीमारी के लक्षण बताने में सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
ऐसी स्थिति में परिवार और caregiver की भूमिका महत्वपूर्ण है।
दवाओं का सरल schedule, reminder system, accessible health information और नियमित appointments उपचार को बेहतर ढंग से जारी रखने में मदद कर सकते हैं। जहां संभव हो, स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों और जानकारी में स्वयं दिव्यांग व्यक्ति की भागीदारी और पसंद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

दिव्यांगजन BP और Diabetes से बचाव के लिए क्या करें?

1. नियमित जांच को प्राथमिकता दें
BP समय-समय पर जांचें। Diabetes के जोखिम वाले व्यक्ति डॉक्टर से Blood Sugar/HbA1c screening के बारे में सलाह लें।
2. अपनी क्षमता के अनुसार Physical Activity करें
सभी के लिए एक जैसी exercise जरूरी नहीं है। Walking संभव न हो तो wheelchair-based activity, adapted exercise, resistance bands, swimming या अन्य सुरक्षित विकल्प डॉक्टर/physiotherapist की सलाह से अपनाए जा सकते हैं।
3. लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से बचें
यदि निर्धारित मात्रा में exercise करना संभव न हो, तो अपनी क्षमता के अनुसार जितनी सुरक्षित activity संभव है, उतनी करने का प्रयास करें। CDC का भी संदेश है कि कुछ activity, बिल्कुल activity न करने से बेहतर है।
4. भोजन पर ध्यान दें
अधिक नमक, अत्यधिक processed food और अतिरिक्त sugar वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करें। भोजन संबंधी योजना व्यक्ति की Diabetes, BP, kidney condition, दवाओं और पोषण आवश्यकताओं के अनुसार डॉक्टर या dietitian से बनवाना बेहतर है।
5. वजन, BP, Sugar और Cholesterol पर नजर रखें
Diabetes से होने वाली कई complications को रोकने या देर करने में Blood Sugar के साथ Blood Pressure और cholesterol का नियंत्रण भी महत्वपूर्ण है।
6. पैरों की नियमित जांच करें
Diabetes वाले व्यक्ति पैरों में कट, छाला, सूजन, लालिमा या ऐसा घाव जो ठीक नहीं हो रहा हो, उसे नजरअंदाज न करें। Sensation कम होने पर caregiver की सहायता ली जा सकती है।
7. आंखों की जांच कराएं
Diabetes आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है। डॉक्टर द्वारा सुझाए गए schedule के अनुसार eye examination कराएं।
8. दवा खुद से बंद न करें
BP या Sugar सामान्य आने का कारण दवा भी हो सकती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना dose कम करना या medicine बंद करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

कितनी Physical Activity होनी चाहिए?

CDC की guidance के अनुसार, जो दिव्यांग वयस्क ऐसा सुरक्षित रूप से कर सकते हैं, उनके लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट moderate-intensity aerobic activity और कम से कम दो दिन muscle-strengthening activity एक सामान्य लक्ष्य है।
लेकिन हर दिव्यांग व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है। यदि यह लक्ष्य पूरा करना संभव न हो तो व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार सक्रिय रहने और inactivity से बचने की सलाह दी जाती है। Exercise का प्रकार disability और अन्य medical conditions को ध्यान में रखकर डॉक्टर या physiotherapist से तय किया जाना चाहिए।

परिवार और समाज की जिम्मेदारी भी जरूरी

सिर्फ दिव्यांग व्यक्ति को “exercise करें” कहना पर्याप्त नहीं है। Accessible parks, gyms, rehabilitation facilities, स्वास्थ्य केंद्र, परिवहन और सुलभ स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
यदि wheelchair user के लिए exercise facility तक पहुंच ही नहीं है, दृष्टिबाधित व्यक्ति के लिए health information accessible format में उपलब्ध नहीं है या बौद्धिक दिव्यांग व्यक्ति को समझने योग्य तरीके से medical instructions नहीं दी जातीं, तो बीमारी का प्रबंधन स्वाभाविक रूप से कठिन हो सकता है।
इसलिए Diabetes और Hypertension की रोकथाम में accessible और inclusive healthcare की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

सबसे महत्वपूर्ण बात

दिव्यांगता बीमारी नहीं है। लेकिन Diabetes और High BP जैसी बीमारियों की अनदेखी किसी व्यक्ति की मौजूदा स्वास्थ्य चुनौतियों को बढ़ा सकती है और कुछ मामलों में नई functional limitations भी पैदा कर सकती है।
समय पर screening, सही उपचार, अपनी क्षमता के अनुसार physical activity, संतुलित भोजन और नियमित medical follow-up से इन बीमारियों और उनकी कई गंभीर complications के जोखिम को कम किया जा सकता है।

Shubhda Shakti का संदेश: दिव्यांगजन को केवल बीमारी का “high-risk group” कह देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें accessible जांच, इलाज, rehabilitation, exercise और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के समान अवसर उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख स्वास्थ्य जागरूकता और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। यह व्यक्तिगत medical diagnosis या treatment का विकल्प नहीं है। किसी भी दवा को शुरू, बंद या उसकी खुराक बदलने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
इसमें खास तौर पर दृष्टिबाधित, mobility impairment/wheelchair users और intellectual/cognitive disability से जुड़े पहलुओं को शामिल किया है। Diabetes के कारण neuropathy, foot problems, kidney disease और vision loss जैसी complications हो सकती हैं, जबकि uncontrolled hypertension stroke का महत्वपूर्ण कारण है। �
World Health Organization +2
साथ ही “दिव्यांगता = बीमारी” जैसी गलत धारणा से बचते हुए लेख रखा गया है। CDC भी स्पष्ट करता है कि disability होने का अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति स्वस्थ नहीं रह सकता; उचित और क्षमता-अनुकूल physical activity स्वास्थ्य व independence दोनों में मदद करती है। �

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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