“जहां व्हीलचेयर रुकी, वहां दोस्त ने कंधा दिया”: फ्लेचर और लैची की दोस्ती ने दुनिया को सिखाया हौसले का मतलब
सिडनी: कहते हैं, सच्चा दोस्त वही होता है जो जिंदगी के आसान रास्तों पर नहीं, बल्कि मुश्किल मोड़ों पर आपका हाथ थामे। ऑस्ट्रेलिया के फ्लेचर क्राउली और लैची बेनेट की दोस्ती इस बात की ऐसी ही खूबसूरत मिसाल है, जिसने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का दिल जीत लिया है।
फ्लेचर पैराप्लेजिक दिव्यांग हैं और व्हीलचेयर के सहारे चलते हैं। लेकिन उनकी दिव्यांगता ने उनके सपनों को कभी छोटा नहीं किया। अपने जिगरी दोस्त लैची के साथ उन्होंने दुनिया घूमने का फैसला किया और अब दोनों एक ऐसी यात्रा पर हैं, जो सिर्फ जगहों की सैर नहीं बल्कि हिम्मत, दोस्ती और जिंदगी को खुलकर जीने की कहानी बन चुकी है।
व्हीलचेयर नहीं पहुंची तो दोस्त ने उठाया जिम्मा

दुनिया घूमना आसान नहीं है और व्हीलचेयर यूजर्स के लिए कई जगहों पर यह चुनौती और बढ़ जाती है। कहीं सीढ़ियां रास्ता रोकती हैं तो कहीं पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्ते।
लेकिन फ्लेचर के सफर में एक ऐसी चीज है जो किसी भी बाधा से बड़ी है—उनका दोस्त लैची।
जहां व्हीलचेयर आगे नहीं बढ़ पाती, वहां लैची अपने दोस्त को अपनी पीठ पर उठा लेते हैं। ऊंची सीढ़ियां हों, कठिन चढ़ाई हो या पथरीला रास्ता, दोनों मिलकर हर चुनौती को पार कर रहे हैं।
दोस्ती की ये तस्वीरें इंटरनेट पर बना रही हैं अपनी जगह

फ्लेचर और लैची अपनी वर्ल्ड ट्रिप की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। उनकी बॉन्डिंग देखकर लोग भावुक भी हो रहे हैं और प्रेरित भी।
लोगों का कहना है—“दोस्त हो तो ऐसा, जो आपकी मुश्किल को अपनी मुश्किल समझे।”
उनकी यात्रा सिर्फ घूमने की नहीं, एक संदेश की है
दोनों का मकसद उन जगहों तक पहुंचना भी है, जिन्हें व्हीलचेयर यूजर्स के लिए मुश्किल माना जाता है। उनकी कहानी दुनिया को यह संदेश देती है कि किसी व्यक्ति की शारीरिक अक्षमता उसके सपनों की सीमा नहीं होनी चाहिए।
जरूरत है ऐसे समाज की, जहां हर व्यक्ति को घूमने, सीखने, अनुभव करने और अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का समान अवसर मिले।

फ्लेचर की व्हीलचेयर रास्ते में रुक सकती है, लेकिन उनका सपना नहीं। और लैची जैसा दोस्त साथ हो, तो शायद कोई मंजिल इतनी दूर भी नहीं।
शुभदा शक्ति सलाम करता है इस दोस्ती को, जो सिर्फ रास्ते नहीं पार कर रही, बल्कि लोगों की सोच की सीमाएं भी तोड़ रही है। ❤️







