दिव्यांग छात्रों ने किया प्रदर्शन: बोले- हमारे अधिकारों का हनन किया जा रहा, सरकार से इस नियम को बदलने की मांग
बीएचयू शुक्रवार को दिव्यांग छात्रों ने सिंहद्वार पर जमकर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन हाल ही में जारी किए गए प्रतियोगी लिखित सार्वजनिक परीक्षाओं के आयोजन हेतु संशोधित व्यापक दिशानिर्देश के खिलाफ किया गया। छात्रों का कहना है कि ये नए नियम दिव्यांगजनों के अधिकारों का हनन करते हैं और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं से बाहर करने की साजिश का हिस्सा प्रतीत होते हैं।
छात्रों द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे
सबसे बड़ी समस्या यह बताई गई कि अधिकांश परीक्षाएं निजी एजेंसियों को आउटसोर्स की जाती हैं, जिनके पास दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षित लेखक उपलब्ध नहीं होते। इससे परीक्षार्थियों को अनुचित परिस्थितियों में परीक्षा देनी पड़ सकती है।
छात्रों ने यह भी कहा कि दिशानिर्देश उम्मीदवारों को एनवीडीए, ब्रेल और बड़े प्रिंट जैसी तकनीकों पर निर्भर रहने को बाध्य करते हैं, जबकि ये तकनीकें अभी पूरी तरह विकसित नहीं हैं और उच्चस्तरीय तकनीकी परीक्षाओं में पर्याप्त सहयोग नहीं कर पातीं।
इसके अलावा, छात्रों का मानना है कि लेखक को लेकर नए नियम अव्यावहारिक हैं। दिशानिर्देशों के अनुसार कक्षा 12वीं के परीक्षार्थी के लिए केवल 9वीं या 10वीं कक्षा के छात्र को लेखक बनाया जा सकता है। छात्रों ने कहा कि ऐसे लेखक अक्सर विषय की गहरी समझ नहीं रखते, जिससे परीक्षार्थियों का नुकसान होता है।
साथ ही, उम्मीदवारों को केवल एक बार ही लेखक बदलने का अवसर दिया गया है, जो उनके अनुसार भेदभावपूर्ण है और आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम की धारा 3 का उल्लंघन करता है।
छात्रों की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि सरकार को इन दिशानिर्देशों को तत्काल वापस लेना चाहिए और दिव्यांग छात्रों, विशेषज्ञों व संस्थानों से विचार-विमर्श करके एक नया, व्यावहारिक और सर्वसम्मति वाला नियम बनाया जाना चाहिए। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।