राजस्थान के दिव्यांग सरकारी कर्मचारियों की फिर से जांच होगी:दिव्यांगता सर्टिफिकेट और डॉक्यूमेंट में कमी पाई गई को एक्शन लेगी सरकार
कार्मिक विभाग ने ऐसी जांच की शुरुआत में सबसे पहले उन कर्मचारियों के मेडिकल के लिए कहा है, जो पिछले 5 साल में सरकारी सेवा में शामिल हुए हैं.

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली और गड़बड़ी के खिलाफ राज्य सरकार एक्टिव मोड में आ गई है। सरकार ने प्रदेशभर के सरकारी विभागों में कार्यरत दिव्यांग कोटे के कर्मचारियों की फिर से जांच करने का फैसला किया है।
इसके लिए सरकारी हॉस्पिटल में एक्सपर्ट डॉक्टर्स की निगरानी में दिव्यांग कर्मचारियों का मेडिकल टेस्ट करवाया जाएगा। साथ ही उनके डॉक्यूमेंट्स की भी फिर से जांच होगी। ऐसे में अगर कोई भी कर्मचारी फर्जी ढंग से नौकरी करता पाया गया तो उसके खिलाफ सरकार सख्त एक्शन लेगी।

दिव्यांग जनों की कैटेगरी और सर्टिफिकेट जचने के लिए प्रक्रिया भी तय की
कार्मिक विभाग ने दिव्यांग कर्मचारी के सर्टिफिकेट जांचने और उनके फिर से मेडिकल कराने को लेकर जरूरी प्रक्रिया भी तय की है. DOP ने कहा है कि मेडिकल बोर्ड के एग्जामिनेशन के दौरान कर्मचारी की दिव्यांगता की स्थिति का भी जिक्र किया जाना चाहिए. यानी, उसकी दिव्यांगता स्थाई श्रेणी की है या नहीं? इसके साथ ही दिव्यांगता का स्तर कैसा है? इसका भी जिक्र होना चाहिए.
40 फ़ीसदी से कम दिव्यांगता की जानकारी कार्मिक विभाग ने अलग से मांगी
सरकारी सेवा में दिव्यांग श्रेणी में आरक्षण के लिए कम से कम 40 फीसदी दिव्यांग होना जरूरी होता है. ऐसे में अगर किसी कर्मचारी की दिव्यांगता 40 फ़ीसदी से कम है, तो उसकी जानकारी भी कार्मिक विभाग में अलग से मांगी है. DOP ने कहा कि, कर्मचारी की दिव्यांग ही नहीं है और अगर उसने गलत सर्टिफिकेट सरकार में दिया है तो ऐसे मामलों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए.

कार्मिक विभाग के शासन सचिव कृष्ण कांत पाठक ने बताया- सरकार ने प्रदेश के सभी विभागों में काम करने वाले दिव्यांग कर्मचारियों की फिर से जांच कराने का फैसला किया है। ऐसे में सरकार की ओर से अधिकृत मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में मेडिकल बोर्ड की निगरानी में उनका नियम अनुसार परीक्षण किया जाएगा।
कार्मिक विभाग सख्त एक्शन लेगा दिव्यांग कर्मचारियों के डॉक्यूमेंट्स की भी फिर से जांच की जाएगी। अगर किसी भी कर्मचारी के दिव्यांगता सर्टिफिकेट या फिर डॉक्यूमेंट में कमी पाई जाती है। उसके खिलाफ कार्मिक विभाग सख्त एक्शन लेगा। कार्मिक विभाग संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को भी शिकायत देगा।
पहले चरण में पिछले 5 साल में सिलेक्ट हुए कर्मचारी दायरे में कार्मिक विभाग के शासन सचिव कृष्ण कांत पाठक ने बताया- पहले चरण में पिछले 5 साल में जितने भी दिव्यांग सरकारी नौकरियों में सिलेक्ट हुए हैं, उनकी फिर से मेडिकल जांच और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करवाया जाएगा। इसके बाद प्रदेशभर में शेष जितने भी दिव्यांग कर्मचारी रहे हैं, उनकी भी जांच फिर से होगी।

