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दिव्यांग-जनों को कपड़े पहनने में हो रही समस्या

दिव्यागों के लिए बनाएंगे फैशनेबल कपड़े

75.2% दिव्यांग-जनों को कपड़े पहनने में हो रही समस्या:देश के 18 राज्यों में फैशन सर्वे; अब 1 हजार डिजाइनर तय करेंगे, कैसे हो परिधान

देश में पहली बार दिव्यांगों के फैशन स्टाइल को लेकर सर्वे किया गया है। सर्वे रिपोर्ट भी आ गई है। अब देशभर के नामचीन और उभरते डिजाइनर्स यह तय करेंगे कि दिव्यांगों के लिए कैसे कपड़े डिजाइन किए जाए।

दरअसल, पाली में स्वावलंबन फाउंडेशन की ओर से यह पहल की गई है। इसके तहत शारीरिक अक्षमताओं से जूझ रहे दिव्यांगों को राहत देने के लिए उनकी सुविधा अनुसार कपड़े डिजाइन किए जाएंगे, जिससे वे फैशन ट्रेंड्स के अनुसार डिजाइनर कपड़े पहन सके।

हालांकि इस पहल के लिए फाउंडेशन की ओर से एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा, जिसमें रजिस्ट्रेशन की लास्ट डेट 30 दिसंबर है। इसमें करीब एक हजार से अधिक नामी और नए फैशन डिजाइनर्स शामिल होंगे। इसमें दिव्यांग जनों की जरूरतों के अनुसार डिजाइनर कपड़े प्रदर्शित किए जाएंगे, जिसका एक्सपर्ट निरीक्षण करेंगे और चयनित फैशन डिजाइनर को सम्मानित भी किया जाएगा।

आयोजकों ने बताया- ‘इंक्लूसिफिट: सुलभ वस्त्र डिजाइन प्रतियोगिता’ मुख्य उद्देश्य प्रगतिशील दिव्यांगताओं, दुर्लभ बीमारियों से प्रभावित व्यक्तियों और व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए उपयुक्त और सुलभ कपड़े डिजाइन करना है, जो उनकी बदलती शारीरिक और मानसिक जरुरतों को ध्यान में रखते हुए आरामदायक हो।

एक हजार फैशन डिजाइनर होंगे शामिल स्वावलंबन फाउंडेशन के प्रमुख डॉ. वैभव भंडारी ने बताया- प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए देशभर से एक हजार से अधिक फैशन डिजाइनिंग के छात्रों और पेशेवर फैशन डिजाइनरों को आमंत्रित किया है। प्रतियोगिता के अंतिम चरण में चयनित प्रतिभागी अपने द्वारा डिजाइन किए गए वस्त्रों का प्रदर्शन करेंगे। उनका एक्सपर्ट निरीक्षण करेंगे और क्वालिटी के पैरामीटर्स भी चेक किए जाएंगे।

प्रतियोगिता की ख़ासियत

डिजाइन प्रस्तुत करते समय उपयोग में सरलता, आराम और लुक पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रतिभागी अपनी प्रविष्टियां डिजिटल प्रारूप में जमा कर सकते हैं।

विजेताओं को प्रमाण पत्र और नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

दिव्यांगजनों की समस्याओं पर आधारित सर्वेक्षण फाउंडेशन के प्रमुख डॉ. वैभव भंडारी ने बताया- यह सर्वेक्षण स्वतंत्र रूप से किया गया था, जिसमें देशभर के 18 राज्यों के 210 मरीजों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी। सर्वेक्षण में सामने आया कि कई मस्कुलर डिस्ट्रॉफी समेत कई बीमारियों से पीड़ित दिव्यांग जनों को कपड़े पहनने में कई समस्याएं आती हैं। उन्हें समस्याएं नहीं आए, इसलिए सर्वेक्षण किया गया था।

सर्वे में यह निकलकर आया सामने

  • 70.5% मरीजों को कपड़े पहनते समय हाथ या पैर हिलाने में कठिनाई होती है।
  • 55.8% मरीज स्वतंत्र रूप से कपड़े पहनने में असमर्थ हैं।
  • 75.2% मरीजों को कपड़े पहनने के लिए दूसरों की मदद की आवश्यकता होती है।
  • 62% मरीज कपड़े पहनने में कठिनाई के कारण अपनी कई पसंदीदा गतिविधियों से वंचित रहते हैं।
  • 95.3% मरीज आसानी से पहनने योग्य कपड़ों को आजमाने में रुचि रखते हैं।

फाउंडेशन की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर सयोनी सोनी ने कहा- फैशन केवल दिखावे का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सुविधा और आत्मसम्मान का प्रतीक भी है। हमारी पहल ‘इंक्लूसिफिट’ का मकसद है कि प्रगतिशील दिव्यांगताओं और दुर्लभ बीमारियों से प्रभावित व्यक्ति भी फैशन और आराम का समान अधिकार पा सकें। हमारे साथ दिल्ली की पूर्वा मित्तल, गुजरात की मनीषा वैद्य और हिमाचल की नंदिनी नाग भी जुटी हुई हैं।

 

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

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