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दिव्यांगता को नहीं बनाया कमजोरी; पूरी जिंदगी बने दिव्यांगों की आवाजा, जीता पद्म श्री

11 महीने की उम्र में गंवाए हाथ-पैर फिर दिव्यांगों की आवाज बन जीता पद्म श्री, जानें डॉ. केएस रजन्ना 

डॉ, रजन्ना ने 11 महीने की उम्र में पोलियो के कारण अपने हाथ और पैर दोनों गंवा दिए थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। लगातार दिव्यांग लोगों के लिए काम किया और अब उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार (9 मई) के दिन पद्म पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। उन्होंने कुल 132 लोगों का सम्मान किया। इसमें दिव्यांग समाजसेवी डॉ. केएस रजन्ना भी शामिल थे। जब वह अपना पुरस्कार लेने के लिए चलकर आए तो सभी उन्हें देखते रह गए। डॉ. रजन्ना ने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाया। इसके बाद जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सम्मान ग्रहण किया। सम्मान लेने के बाद वह सभी लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। इस दौरान उनकी मदद के लिए एक जवान आगे आया, लेकिन डॉ. रजन्ना ने मदद लेने से मना कर दिया। यह पल उनके पूरे जीवन की कहानी बयां करता है।


पोलियो के कारण मजह 11 महीने की उम्र में डॉ. रजन्ना को अपने हाथ और पैर धोने गंवाने पड़े थे। उन्हें घुटनो के बल चलना सीखा और उनके हाथ कुहनी के आगे पोलियोग्रस्त हैं, लेकिन उन्होंने इसके बावजूद खुद को किसी से कम नहीं आंका। इसके उलट उन्होंने दिव्यांग लोगों के लिए काम करने का फैसला किया।

2013 में बने कमिश्नर

समाजसेवा में आने के बाद उन्होंने लगातार काम किया और 2013 में सरकार ने उन्हें दिव्यांगों के लिए राज्य कमिश्नर बना दिया। कर्नाकट के बेंगलुरू के रहने वाले रजन्ना को तीन साल के लिए यह पद दिया गया था, लेकिन उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले ही उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। उनकी जगह कमलाक्षी को यह जिम्मेदारी दी गई, लेकिन कर्नाटक सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध हुआ। अहम यह था कि रजन्ना को इस बारे में जानकारी तक नहीं दी गई थी कि उन्हें हटाया गया है। इसके बाद सरकार ने दोबारा उन्हें यह पद दे दिया। अब उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

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