1) समाज की सोच (भारत बनाम विदेश)
भारत: हालिया सर्वे बताते हैं कि शहरी भारतीयों की नज़र में शारीरिक दिव्यांगता वाले लोग अब भी “सबसे असमान व्यवहार” झेलने वालों में ऊपर हैं—यानी सहानुभूति है, पर कलंक/पक्षपात भी बना रहता है।
विदेश: विकसित देशों में क़ानून और सार्वजनिक विमर्श ने संवेदनशीलता बढ़ाई है, पर भेदभाव के मामले (जैसे कार्यस्थल पर “reasonable accommodations” न देना) अब भी सुर्ख़ियों में आते रहते हैं—जैसे यूके में हालिया केस में मुआवज़ा मिला।
2) सुविधाएँ/सेवाएँ: क्या मिलता है?
भारत
क़ानून: RPwD Act, 2016 — 21 श्रेणियों को कवर; सरकारी नौकरियों में 4% आरक्षण, उच्च शिक्षा में 5% आरक्षण का प्रावधान।
एसेसिबिलिटी मिशन: Accessible India (Sugamya Bharat)—इमारतें/ट्रांसपोर्ट/वेबसाइट्स को सुलभ बनाने के लक्ष्य; इसी के तहत Sugamya Bharat App से नागरिक फोटो-जीओटैग के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं (2,700+ शिकायतें, जिनमें ~1,900 निपटी होने का आधिकारिक दावा; मीडिया रिपोर्ट्स में लंबित मामलों पर प्रश्न भी उठे)।
पहचान/लाभ: UDID कार्ड—देशव्यापी डेटाबेस/डिजिटल प्रमाण-पत्र; ऑनलाइन आवेदन, राज्य अस्पतालों द्वारा मेडिकल बोर्ड से प्रमाणन।
अन्य: पेंशन/छात्रवृत्ति/कर-राहत जैसे लाभ राज्य/केंद्र योजनाओं में; (उदा. NSAP के तहत दिव्यांग पेंशन—राज्यों के अनुसार राशि अलग-अलग)। (राशि/मानदंड समय-समय पर बदलते हैं, इसलिए स्थानीय नोटिफ़िकेशन देखें).
विदेश (उदाहरण: अमेरिका/यूके/ईयू)
अमेरिका: ADA के तहत रोज़गार, सार्वजनिक सेवाएँ, परिवहन/भवन—सभी में भेदभाव निषिद्ध; नियोक्ताओं पर “reasonable accommodation” की कानूनी ज़िम्मेदारी।
यूके: Equality Act 2010—कार्यस्थल व सार्वजनिक जीवन में भेदभाव-विरोधी सुरक्षा; संगठनों पर “reasonable adjustments” का दायित्व।
ईयू: European Accessibility Act (Directive 2019/882)—28 जून 2025 से कई उत्पाद/सेवाओं के लिए न्यूनतम सुलभता मानक लागू।
3) एनजीओ/सिविल सोसायटी: कौन-कौन सक्रिय?
भारत: NCPEDP, Sightsavers India, Amar Seva Sangam, ADAPT (पूर्व Spastics Society), Vidya Sagar, National Association for the Blind, Svayam, RampMyCity जैसी संस्थाएँ रोज़गार-अधिकार, एसेसिबिलिटी ऑडिट, रैम्प/टैक्टाइल/साइन लैंग्वेज, शिक्षा व पुनर्वास पर काम करती हैं। (प्रभाव के हालिया उदाहरण/रिपोर्टें उपलब्ध)।
विदेश: Humanity & Inclusion (HI), CBM, Leonard Cheshire, Special Olympics, Sightsavers इत्यादि—शिक्षा/स्वास्थ्य/समावेशन पर बहुदेशीय कार्यक्रम चलाते हैं।
प्रतिशत का सवाल: किसी देश में कुल एनजीओ में से “दिव्यांगता क्षेत्र” वाली संस्थाओं का भरोसेमंद प्रतिशत सार्वजनिक रूप से ट्रैक नहीं होता; अलग-अलग रजिस्ट्रियों व परिभाषाओं के कारण तुलना संभव नहीं। इसलिए प्रतिशत के बजाय उदाहरण/परिणाम और सरकारी साझेदारियों के आँकड़े अधिक विश्वसनीय हैं। (यह सीमा दोनों—भारत व विदेश—पर लागू है).
4) सरकार का सहयोग: “काग़ज़ से ज़मीन” तक
नीतियाँ/क़ानून: भारत में RPwD Act 2016 + UNCRPD का अनुसमर्थन; अमेरिका/यूके/ईयू में कठोर एंटी-डिस्क्रिमिनेशन व एसेसिबिलिटी मानक—ये वैश्विक बेंचमार्क बनते हैं।
इंफ़ोर्समेंट/अमल: भारत में प्रगति मिली-जुली—कहीं बस/मेट्रो/इमारतों पर रैम्प/लिफ्ट/टैक्टाइल, तो कहीं बुनियादी अवरोध; Sugamya Bharat App/एसेसिबिलिटी गाइडलाइन्स के बावजूद जमीनी अड़चनें और लंबित शिकायतें दिखती हैं।
5) “शिकायत कैसे करें?” (भारत)
1. Sugamya Bharat App पर भवन/ट्रांसपोर्ट/आईसीटी से जुड़ी एसेसिबिलिटी शिकायत फोटो+लोकेशन के साथ दर्ज करें।
2. Chief Commissioner for Persons with Disabilities (CCPD) या State Commissioner के समक्ष ऑनलाइन पोर्टल/डाक/ईमेल से शिकायत—Rule 38 (RPwD Rules, 2017) के दस्तावेज़ लगाना ज़रूरी।
3. CPGRAMS पर मंत्रालय/विभाग से जुड़ी शिकायतें दर्ज करें (DEPwD के लिए भी)।
(UDID/डिसएबिलिटी सर्टिफ़िकेट बनाने/अपडेट के लिए UDID पोर्टल/मान्यता प्राप्त अस्पताल से प्रक्रिया पूरी करें).
6) झटपट तुलना (सारांश)
क़ानून: भारत—RPwD Act (4% नौकरी आरक्षण, 5% शिक्षा आरक्षण); विदेश—ADA/Equality Act/EAA जैसे कड़े एंटी-डिस्क्रिमिनेशन/एसेसिबिलिटी क़ानून।
सेवाएँ: भारत—UDID, Sugamya Bharat, पेंशन/स्कॉलरशिप; विदेश—वर्कप्लेस reasonable accommodation, सार्वभौमिक डिज़ाइन मानक व्यापक।
समाजिक रवैया: दोनों जगह सुधार हो रहा, पर कलंक/अनभिज्ञता अब भी बाधा—यह बात भारत के सर्वे व यूके/अन्य जगहों के मामलों से भी झलकती है।
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बोनस: एक ठोस फ़ैक्ट फ़ाइल
दुनिया की आबादी का ~16% किसी-न-किसी महत्वपूर्ण दिव्यांगता के साथ जीता है (WHO/World Bank आकलन—“हर देश, हर समाज” का प्रश्न है)।