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देशभर में मनाई जाती हैं 7 तरह की तीज

 

 

 

हिंदू धर्म में “तीज” नाम से कई व्रत-त्योहार प्रचलित हैं, लेकिन इनमें से 7 तीज़ विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। तृतीया तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता गौरी हैं। हालांकि इस तिथि पर सामान्यत: शिवपूजन वर्जित होता है, लेकिन हरियाली, कजरी और हरतालिका तीज़ पर शिव–पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। आइए जानते हैं 7 प्रमुख तीज़ और उनके विधान—

 

1. हरियाली तीज

 

श्रावण मास शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है।

 

महिलाएं मेहंदी रचाती हैं, हरे वस्त्र पहनती हैं और झूला झूलती हैं।

 

यह पर्व आस्था, प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक है।

 

भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाया जाता है।

 

2. कजरी तीज

 

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया को आती है।

 

इसे “कजली” या “सातुड़ी तीज” भी कहते हैं क्योंकि इसमें सत्तू का विशेष महत्व है।

 

महिलाएं निर्जला उपवास रखकर शिव–पार्वती की पूजा करती हैं।

 

इस दिन कजरी गीत गाए जाते हैं और कई जगह गायों व नीमड़ी माता की पूजा भी होती है।

 

3. हरतालिका तीज

 

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है।

 

यह व्रत अत्यंत कठोर होता है, जिसमें दिन-रात पूजा और रात्रि जागरण किया जाता है।

 

विवाहित स्त्रियां पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए, जबकि अविवाहित युवतियां मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं।

 

कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इसे “गौरी हब्बा” कहते हैं।

 

4. आखा तीज (अक्षय तृतीया)

 

वैशाख शुक्ल तृतीया को आती है।

 

यह तिथि “अक्षय” फल देने वाली मानी जाती है।

 

विवाह, स्वर्ण क्रय, नया व्यापार शुरू करने और गृहप्रवेश के लिए अत्यंत शुभ होती है।

 

इस दिन भगवान परशुराम, नर-नारायण और हयग्रीव के अवतार हुए थे।

 

5. गणगौर तीज

 

चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है।

 

मुख्यतः राजस्थान, एमपी और गुजरात में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

 

“गण” का अर्थ है शिव और “गौर” का अर्थ है पार्वती।

 

महिलाएं मिट्टी की गौरी माता की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा करती हैं और अखंड सुहाग की कामना करती हैं।

 

6. रंभा तीज

 

ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है।

 

देवी रंभा, माता लक्ष्मी और शिव–पार्वती की पूजा की जाती है।

 

विवाहित स्त्रियां पति की लंबी आयु व सौभाग्य के लिए, और अविवाहित कन्याएं योग्य वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं।

 

महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं और देवी रंभा को भी श्रृंगार का सामान अर्पित करती हैं।

 

7. वराह तीज

 

भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है।

 

इस दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार की जयंती होती है।

 

मान्यता है कि भगवान वराह ने इस दिन हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी (भूदेवी) को समुद्र से उद्धार किया था।

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Author: sshakti

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