

इन केंद्रों को दिव्यांग बच्चों की सुविधा के लिहाज से डिजाइन किया जाएगा। हर केंद्र में बच्चों की मदद करने के लिए छह विशेषज्ञों की टीम काम करेगी, जिसमें स्पीच थेरपिस्ट, फिजियोथेरपिस्ट, ऑक्युपेशनल थेरपिस्ट और बिहैवियरल एक्सपर्ट शामिल होंगे। ये विशेषज्ञ बच्चों की बोलने, चलने-फिरने, रोजमर्रा के काम करने और व्यवहार सुधारने की क्षमता को बेहतर करेंगे। साथ ही, काउंसलिंग के जरिए बच्चों और उनके परिवारों को मानसिक संतुष्टि भी देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन केंद्रों से बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होगा, जिससे वे मुख्यधारा की शिक्षा का हिस्सा बन सकेंगे।

ये केंद्र बादली, पश्चिम विहार, विश्वास नगर, मंगोलपुरी, नारायणा, द्वारका, नजफगढ़, छतरपुर, मदनपुर खादर और प्रताप नगर में खोले जाएंगे। हरएक केंद्र में बच्चों की जरूरतों के हिसाब से इलाज और पढ़ने की सुविधा रहेगी। माता-पिता को भी यहां पर परामर्श की सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर शुरू की है। इन केंद्रों से बच्चों को शिक्षा, कौशल के जरिये उनके जीवन में बदलाव लाने की कोशिश है। ये केंद्र जिला स्तर पर नोडल संस्थान की तरह काम करेंगे, जहां दिव्यांगता से जुड़ी योजनाओं की निगरानी और शिक्षकों व अभिभावकों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। दिव्यांग बच्चों को इससे नई उम्मीद मिलेगी। उनके लिए शिक्षा, इलाज और सपनों को हकीकत में बदलने का रास्ता अब आसान होगा।
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