क्या भारत में आने वाला है ‘प्रलय’ जैसा मौसम? 2026-27 के ‘Super El Niño’ पर वैज्ञानिकों की चेतावनी, दिव्यांगजन क्यों रहें विशेष सतर्क
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नई दिल्ली /अजमेर । क्या 2026-27 में भारत को भीषण गर्मी, सूखा, जंगलों की आग और बदलते मानसून जैसी असाधारण मौसमी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है? संभावित शक्तिशाली ‘Super El Niño’ को लेकर वैज्ञानिक समुदाय की चिंता ने इस सवाल को चर्चा में ला दिया है। 188 पर्यावरण एवं मौसम विशेषज्ञों से जुड़ी एक सामूहिक अपील में संभावित El Niño के पारिस्थितिक प्रभावों की समय रहते निगरानी और अध्ययन पर जोर दिया गया है।
आखिर Super El Niño है क्या?
El Niño प्रशांत महासागर की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तापमान और वर्षा के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। भारत में इसका असर हर बार एक जैसा नहीं होता, इसलिए अभी से किसी निश्चित विनाशकारी परिणाम की भविष्यवाणी करना उचित नहीं होगा।
वैज्ञानिकों की चिंता यह है कि यदि 2026-27 का El Niño असाधारण रूप से शक्तिशाली हुआ, तो अत्यधिक गर्मी, कम या असमान बारिश, सूखे जैसी परिस्थितियां, जंगलों में आग और कृषि एवं जल संसाधनों पर दबाव जैसे खतरे बढ़ सकते हैं। मछुआरों, किसानों और पशुपालकों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।

दिव्यांगजनों के लिए क्यों बढ़ सकती हैं मुश्किलें?
ऐसी आपदाओं का असर सभी पर पड़ता है, लेकिन दिव्यांगजनों के सामने कुछ अतिरिक्त चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (UNDRR) के अनुसार, आपदाओं में दिव्यांगजन अक्सर असमान रूप से प्रभावित होते हैं, विशेषकर जब चेतावनी, परिवहन और राहत व्यवस्था सुलभ न हो।
भीषण गर्मी में सीमित गतिशीलता या कुछ स्वास्थ्य आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों को अतिरिक्त सावधानी की जरूरत हो सकती है। बाढ़ या चक्रवात के दौरान व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए evacuation कठिन हो सकता है। वहीं दृष्टिबाधित और श्रवणबाधित लोगों तक चेतावनी केवल एक माध्यम में पहुंचने पर महत्वपूर्ण जानकारी छूट सकती है। बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांगता वाले कुछ व्यक्तियों को अचानक दिनचर्या बदलने या जटिल आपात निर्देश समझने में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
पहले से तैयारी बन सकती है सुरक्षा कवच
दिव्यांग व्यक्ति और परिवार व्यक्तिगत Emergency Plan तैयार रखें। जरूरी दवाएं, मेडिकल रिकॉर्ड, डॉक्टर व परिजनों के नंबर, पानी, आवश्यक खाद्य सामग्री, power bank, hearing-aid batteries तथा जरूरत के मुताबिक assistive devices तैयार रखना उपयोगी है। बिजली पर निर्भर चिकित्सा उपकरणों के लिए backup power plan भी जरूरी हो सकता है।
प्रशासन के लिए भी चुनौती साफ है—आपदा की चेतावनी ऐसी हो जिसे हर व्यक्ति समझ और प्राप्त कर सके। ऑडियो, विजुअल, captions/sign language और सरल भाषा में alerts के साथ accessible transport और राहत शिविरों की व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
‘प्रलय’ वाली हेडलाइन का सच
यह समझना जरूरी है कि वैज्ञानिकों ने भारत में निश्चित रूप से ‘प्रलय’ आने की भविष्यवाणी नहीं की है। चिंता संभावित शक्तिशाली El Niño और उससे पैदा होने वाली असाधारण परिस्थितियों को लेकर है। इसलिए डर फैलाने के बजाय संदेश स्पष्ट है—मौसम को लेकर सतर्कता, वैज्ञानिक निगरानी और ऐसी आपदा तैयारी जिसमें दिव्यांगजन भी बराबर शामिल हों।
शुभदा शक्ति संदेश: “आपदा सबके लिए है, तो सुरक्षा और चेतावनी भी सबके लिए सुलभ होनी चाहिए।”






