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कालसर्प दोष निवारण पूजा: कारण, प्रभाव और प्रभावी ज्योतिषीय समाधान”

 

 

कालसर्प दोष निवारण पूजा, जिसे कालसर्प योग पूजा भी कहा जाता है, जो कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए किया जाता है। यह पूजा राहु और केतु ग्रहों की शांति के लिए की जाती है, जो कालसर्प दोष का मुख्य कारण माने जाते हैं।

कालसर्प दोष के कारण:

ऐसे तो कई प्रकार से काल सर्प बनता है पर कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी ग्रहों के स्थित होने पर पूर्ण कालसर्प दोष की संज्ञा कहीं है।

यह दोष व्यक्ति के जीवन में कई तरह की समस्याएं और बाधाएं ला सकता है, जैसे कि स्वास्थ्य समस्याएं, आर्थिक परेशानियां, वैवाहिक जीवन में समस्याएं, और करियर में रुकावटें।

कालसर्प दोष निवारण पूजा के लाभ:

यह पूजा कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद करती है।

व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

आर्थिक, पारिवारिक और मानसिक समस्याओं से राहत मिलती है।

करियर और व्यवसाय में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

व्यक्ति को मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।

यह पूजा भगवान शिव और नाग देवता को प्रसन्न करने के लिए भी की जाती है।

उज्जैन में कालसर्प दोष निवारण पूजा का विशेष महत्व है

उज्जैन, कालसर्प दोष निवारण पूजा के लिए एक प्रसिद्ध स्थान है, खासकर क्षिप्रा नदी के किनारे बने किसी भी प्रांगण या मंदिर में।

यहां कालसर्प दोष निवारण पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है।

उज्जैन महाकालेश्वर की नगरी में कालसर्प दोष निवारण पूजा करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

कालसर्प दोष निवारण पूजा कैसे कराएं:

कालसर्प दोष निवारण पूजा किसी योग्य पंडित या कर्मकांडी ब्राह्मण से करवानी चाहिए।

उज्जैन में, महाकालेश्वर मंदिर के पास कई पंडित हैं जो यह पूजा करवाते हैं।

पूजा करवाने से पहले, पंडित से संपर्क करके पूजा की विधि, मुहूर्त और आवश्यक सामग्री के बारे में जानकारी प्राप्त कर लें।

पूजा के दौरान, पंडित द्वारा बताए गए नियमों का पालन करें और भगवान शिव और नाग देवता की विधिवत पूजा करें।

अनंतं वासुकि शेष पद्मनाभं च कम्बलम्।

शड्खपाल धार्तराष्ट्र तक्षकं कालियं तथा॥१॥

एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।

सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः॥२॥

तस्मे विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयीं भवेत्।

 

॥ नाग गायत्री मंत्र ॥

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ॐ नव कुलाय विध्महे विषदन्ताय धीमाहि तन्नो सर्प प्रचोदयात ll

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

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