राजस्थान में दिव्यांगों का है यह हाल, आरटीआई में हुआ बड़ा खुलासा
सरकार दिव्यांगों के लिए चाहे कितनी भी घोषणा करे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बता रही है।

दिव्यांगों को विशेष योग्यजन कहने मात्र से उनका भला नहीं हो सकता। जब तक उनको शिक्षा के समान अवसर नहीं मिलेंगे। प्रदेश में 15 लाख में से करीब 7 लाख दिव्यांग तो अनपढ़ हैं। जबकि, दिव्यांगों को शिक्षा से जोडऩे के लिए गैर सरकारी संगठनों के जरिए केवल 2400 विद्यार्थियों को पढ़ाने की जगह हैं। जो शिक्षित हैं उनमें 59 फीसदी तो केवल दसवीं कक्षा उत्तीर्ण हैं। इससे साफ है कि सरकार के स्तर पर दिव्यांगों को शिक्षा से जोडकऱ आगे बढ़ाने के प्रयास नाकाफी हैं। यह किसी सर्वे के तहत मिली जानकारी नहीं, बल्कि आरटीआई के तहत हुआ खुलासा है। आरटीआई एक्टिविस्ट दीपेंद्र आर्य को मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेशभर मे 15 लाख 63 हजार 694 दिव्यांग हैं। जिसमें से 45 फीसदी अशिक्षित हैं।
जयपुर पहले व अलवर तीसरे नम्बर पर
पूरे प्रदेश में सबसे अधिक दिव्यांग जयपुर में 1 लाख 58 हजार 909 हैं। दूसरे नम्बर पर जोधपुर में 91 हजार 730, तीसरे नम्बर पर उदयपुर व अलवर में सबसे अधिक हैं। अलवर जिले में 82 हजार 242 दिव्यांग हैं। जिसमें से पुरुष 45 हजार 568, महिला 36 हजार 674 हैं। वर्गवार में 16 हजार 537 दृष्टिबाधित, 12 हजार 458 श्रवण बाधित, 3 हजार 747 बोल नहीं सकते, 22 हजार 598 हिल नहीं सकते, 9 हजार 140 अन्य तरीके से, 12 हजार 358 मल्टीपल डिसेबल हैं।

29 आवासीय व गैर आवासीय स्कूल
जानकारी के अनुसार प्रदेश में 29 आवासीय व गैर आवासीय स्कूल हैं। जिनमें दिव्यंागों को प्रवेश दिया जाता है। लेकिन यहां केवल 2400 सीट हैं। इसके अलावा जयपुर में पौद्दार सरकारी संस्थान नहीं हैं। जहां विकलांगों के पढ़ाई के इंतजाम हों। जबकि दिव्यांगों की संख्या 15 लाख से अधिक हैं। वैसे एनजीओ की संख्या लाखों में है। इसके बावजूद भी दिव्यांगों को भला नहीं हो रहा है।

दिव्यांग अलग-अलग वर्ग में
दृष्टि बाधित 3 लाख 14 हजार 618,
श्रवण बाधित 2 लाख 18 हजार 873,
बोल नहीं सकते 69 हजार 484,
हिलढुल नही सकते 4 लाख 27 हजार 364,
मानसिक रूप से बीमार 41 हजार 47,
अन्य प्रकार से दिव्यांग 1 लाख 99 हजार 696,
मल्टीपल डिसेबल 2 लाख 11 हजार 223 दिव्यांग हैं।






