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अलवर की दृष्टिहीन हिमानी जैन ने रचा का इतिहास

अलवर की दृष्टिहीन हिमानी जैन ने 12वीं में हासिल किए 92.40% अंक, सुनकर ही याद हो जाती थी हर बात

अलवर की हिमानी ने जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद अपनी लगन और दृढ़ निश्चय से वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना भी कई बार सामान्य व्यक्ति नहीं कर पाते.

अक्सर कहा जाता है कि जहां चाह, वहां राह. इस कहावत को अलवर के खेड़ली कस्बे की हिमानी जैन ने सच कर दिखाया है. जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद हिमानी ने अपनी लगन और दृढ़ निश्चय से वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना भी कई बार सामान्य व्यक्ति नहीं कर पाते. उन्होंने हाल ही में घोषित 12वीं कला वर्ग के परिणामों में 92.40% अंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे कस्बे का नाम रोशन किया है.

कमजोरी को बनाया अपनी ताकत

हिमानी की यह उपलब्धि किसी चमत्कार से कम नहीं है. आंखों से दिव्यांग होते हुए भी उन्होंने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाया. उनके पिता उमेश जैन, जो आइसक्रीम पार्लर का काम करते हैं, बताते हैं कि हिमानी जन्म से ही आंखों से देख नहीं पाती थीं. लेकिन हिमानी ने कभी हार नहीं मानी. अपनी पढ़ाई के प्रति उनका जुनून अद्वितीय रहा है.

सुनकर की पढ़ाई, पाई शानदार सफलता

कक्षा दसवीं में भी हिमानी ने 84% अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था. इसके बाद उन्होंने एक निजी स्कूल में 12वीं की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया. स्कूल में अध्यापकों द्वारा कक्षा में पढ़ाए जाने वाले हर पाठ को हिमानी ने केवल सुनकर ही याद किया और उसका अभ्यास किया. उनकी इस सुनने और समझने की क्षमता ने उन्हें यह शानदार सफलता दिलाई.

परिवार में जश्न का माहौल

हिमानी की इस कामयाबी से उनके पूरे परिवार में खुशी का माहौल है. माता-पिता, दादी, चाचा-चाची सभी ने इस खुशी में जश्न मनाया और मिठाइयां बांटीं. हिमानी की मां पूनम जैन, जो एक गृहणी हैं, अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर बेहद खुश और गौरवान्वित हैं. हिमानी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार के सभी सदस्यों के साथ-साथ अपने अध्यापकों को दिया है, जिन्होंने पढ़ाई में उनका हर कदम पर हौसला बढ़ाया.

 

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

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