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दिव्यांग पर अगर किया अत्याचार तो होगी इतनी बड़ी सजा

 

 

 

 

 

 

भारत में दिव्यांगजनों (Persons with Disabilities) पर होने वाले अत्याचार, भेदभाव और शोषण को रोकने के लिए कई कानून और प्रावधान बनाए गए हैं। ये न केवल सजा का प्रावधान करते हैं बल्कि दिव्यांगों को समान अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए सुरक्षा भी प्रदान करते हैं। मुख्य कानून और प्रावधान इस प्रकार हैं:

1. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016)

 

यह अधिनियम पुराने 1995 के कानून को बदलकर लाया गया।

 

दिव्यांगों के लिए समान अवसर, बिना भेदभाव के शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देता है।

 

अत्याचार या शोषण पर दंड:

 

कोई भी व्यक्ति अगर दिव्यांग के साथ जानबूझकर दुर्व्यवहार, अपमान या शोषण करता है, तो उस पर 6 महीने से 5 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

 

 

भेदभाव पर रोक:

 

किसी संस्था, कार्यालय या व्यक्ति द्वारा दिव्यांग को सेवा, अवसर, शिक्षा या रोजगार से वंचित करना कानूनन अपराध है।

 

2. भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधान

 

दिव्यांगों पर अत्याचार को सामान्य अपराधों के अंतर्गत भी सख्ती से लिया जा सकता है:

 

IPC धारा 319–338 : शारीरिक चोट पहुँचाना (Grievous Hurt), जिसमें दिव्यांग व्यक्ति को जानबूझकर चोट पहुँचाने पर सजा बढ़ सकती है।

 

IPC धारा 354 : किसी भी महिला दिव्यांग के साथ छेड़छाड़ या शीलभंग करने पर कड़ी सजा।

 

IPC धारा 503–506 : डराने-धमकाने और धमकी देने पर सजा।

 

IPC धारा 323 व 325 : साधारण या गंभीर चोट पहुँचाने पर दंड।

3. अन्य संबंधित कानून और नीतियाँ

 

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (Human Rights Protection Act)

 

दिव्यांगों पर होने वाले किसी भी मानवाधिकार उल्लंघन पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राज्य मानवाधिकार आयोग कार्रवाई कर सकता है।

 

 

न्यायालय के फैसले

 

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने समय-समय पर फैसले दिए हैं कि दिव्यांगों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 (समानता, स्वतंत्रता और जीवन का अधिकार) के अंतर्गत आता है।

संयुक्त राष्ट्र दिव्यांगजन अधिकार कन्वेंशन (UNCRPD)

 

भारत इसका हस्ताक्षरकर्ता है, इसलिए दिव्यांगों के खिलाफ किसी भी भेदभाव पर अंतरराष्ट्रीय मानक लागू होते हैं।

 

4. संविधान के विशेष अनुच्छेद

 

अनुच्छेद 15 : भेदभाव निषेध (जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान के साथ-साथ दिव्यांगता के आधार पर भी)

 

अनुच्छेद 41 : राज्य दिव्यांगजनों को शिक्षा और रोजगार के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए।

 

अनुच्छेद 21 : जीवन और गरिमा का अधिकार।

 

संक्षेप में दंड प्रावधान

 

6 महीने से 5 साल तक की कैद और जुर्माना, अगर दिव्यांग पर अत्याचार, दुर्व्यवहार, शोषण या अपमान किया जाता है।

 

अन्य IPC धाराओं के तहत अपराध की प्रकृति के अनुसार अतिरिक्त सजा भी दी जा सकती है।

 

 

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

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