हार्ट अटैक के दौरान हर गुजरता मिनट जिंदगी और मौत के बीच का फासला बढ़ा सकता है। सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी और अचानक पसीना आने जैसे संकेतों को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। आखिर हार्ट अटैक के बाद शुरुआती एक घंटे को ‘गोल्डन आवर’ क्यों कहा जाता है और समय पर इलाज मिलने से जान बचने की संभावना कितनी बढ़ सकती है?
हार्ट अटैक में हर मिनट क्यों है कीमती?

हृदय हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। जब हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट पैदा होती है, तो हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम या बंद हो सकती है। इसी स्थिति को हार्ट अटैक कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त प्रवाह बाधित रहने पर हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचना शुरू हो सकता है। उपचार में जितनी अधिक देरी होती है, स्थायी नुकसान और गंभीर जटिलताओं का खतरा उतना बढ़ सकता है।
क्या होता है गोल्डन आवर?
हार्ट अटैक के बाद शुरुआती एक घंटे को अक्सर ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। इस दौरान जल्द चिकित्सा सहायता मिलने से हृदय की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को कम करने की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि एक घंटे बाद इलाज बेकार हो जाता है। मरीज को जितनी जल्दी उचित उपचार मिलेगा, उसके लिए उतना बेहतर होगा।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर
अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझते हैं, जबकि दोनों अलग स्थितियां हैं।
हार्ट अटैक में हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनी में रुकावट आती है। वहीं कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक प्रभावी ढंग से रक्त पंप करना बंद कर देता है।
गंभीर हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है। कार्डियक अरेस्ट होने पर तुरंत सीपीआर और उपलब्ध होने पर एईडी की सहायता मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
इन पांच लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें
1. सीने में तेज दर्द, दबाव या जकड़न महसूस होना।
2. बाएं या दोनों हाथों, गर्दन, जबड़े अथवा पीठ में दर्द फैलना।
3. अचानक अत्यधिक पसीना आना।
4. सांस लेने में परेशानी या घबराहट होना।
5. चक्कर आना, मतली या असामान्य कमजोरी महसूस होना।
विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज से प्रभावित व्यक्तियों में हार्ट अटैक के लक्षण अलग भी हो सकते हैं।
हार्ट अटैक आने पर तुरंत क्या करें?
हार्ट अटैक का संदेह होने पर सबसे पहले आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाएं। भारत में 112 या उपलब्ध एम्बुलेंस सेवा 108 पर संपर्क किया जा सकता है।
मरीज को आरामदायक स्थिति में बैठाएं और अनावश्यक शारीरिक गतिविधि से बचाएं। स्वयं वाहन चलाकर अस्पताल जाने के बजाय एम्बुलेंस की सहायता लेना बेहतर है।
यदि मरीज बेहोश हो जाए और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा हो, तो तुरंत सीपीआर शुरू करें। उपलब्ध होने पर एईडी का उपयोग उसके निर्देशों के अनुसार करें।
क्या समय पर इलाज मिलने से बच सकती है जान?
यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच और उपचार से हार्ट अटैक के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है तथा जान बचने की संभावना बेहतर हो सकती है।
हालांकि प्रत्येक मरीज की स्थिति अलग होती है। हार्ट अटैक की गंभीरता, उम्र, पहले से मौजूद बीमारियां और उपचार मिलने का समय परिणाम को प्रभावित करते हैं। इसलिए किसी विशेष मामले में यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि समय पर इलाज मिलने से जान अवश्य बच जाती।
शुभदा शक्ति की विशेष अपील
आज जरूरत है कि प्रत्येक परिवार हार्ट अटैक के शुरुआती संकेतों को पहचाने। स्कूलों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर सीपीआर प्रशिक्षण तथा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।
हार्ट अटैक के दौरान सबसे खतरनाक फैसला दर्द को सहते रहना और अस्पताल जाने में देरी करना हो सकता है।
याद रखिए, सीने का हर दर्द हार्ट अटैक नहीं होता, लेकिन हार्ट अटैक समझकर समय पर जांच करवाना किसी की जिंदगी बचा सकता है।
क्योंकि हार्ट अटैक में हर गुजरता मिनट केवल घड़ी का समय नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने का एक अनमोल अवसर होता है।
— शुभदा शक्ति न्यूज़ | नि:शक्त की शक्ति
नोट: यह स्वास्थ्य जागरूकता पर आधारित लेख है। किसी व्यक्ति की मृत्यु, उसके कारण या उपचार में देरी के बारे में बिना प्रमाणित चिकित्सकीय जानकारी के निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।






