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जी, सुना क्या ?? “अब हवा में तारागढ़ की राह!”

रोपवे सिर्फ सैर नहीं, बदल सकता है अजमेर का पर्यटन नक्शा—लेकिन क्या शहर है इसके लिए तैयार?

अजमेर। अरावली की पहाड़ियों, ऐतिहासिक तारागढ़ और धार्मिक पर्यटन के लिए पहचाने जाने वाले अजमेर में रोपवे की चर्चा एक बार फिर शहर के भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करती है। सवाल केवल यह नहीं कि रोपवे बने या नहीं, बल्कि यह है कि क्या इसे अजमेर के लिए एक आधुनिक, सुरक्षित और सभी के लिए सुलभ पर्यटन मॉडल में बदला जा सकता है?

तारागढ़ तक यात्री रोपवे का विचार नया नहीं है। केंद्र सरकार के वन स्वीकृति पोर्टल पर उपलब्ध परियोजना दस्तावेज में राजाजी का तालाब से तारागढ़ किले तक यात्री रोपवे प्रस्तावित है। पुराने प्रस्ताव में परियोजना की अनुमानित लागत ₹16 करोड़ और लगभग 0.859 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग का उल्लेख है। हालांकि ये आंकड़े पुराने प्रस्ताव से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें मौजूदा लागत या अंतिम परियोजना स्वरूप नहीं माना जाना चाहिए।

रोपवे से पहले सवाल—आखिर कैसा पर्यटन चाहता है अजमेर?

यदि रोपवे को केवल एक पर्यटक आकर्षण की तरह विकसित किया गया, तो इसका लाभ सीमित रह सकता है। लेकिन यदि इसे तारागढ़, आनासागर, दरगाह क्षेत्र और शहर के दूसरे पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली व्यापक योजना के साथ देखा जाए तो यह अजमेर की पर्यटन पहचान में बड़ा बदलाव ला सकता है।

इसका एक महत्वपूर्ण पहलू ट्रैफिक भी है। तारागढ़ की ओर जाने वाले वाहनों की संख्या कम करने में रोपवे मददगार हो सकता है, लेकिन इसके निचले स्टेशन पर पर्याप्त पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था नहीं हुई तो समस्या पहाड़ी से हटकर शहर की सड़कों पर आ सकती है।

अजमेर में इस समय आनासागर के पुनर्जीवन पर भी काम आगे बढ़ रहा है। राजस्थान के ई-प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड में आनासागर की desilting और capacity restoration के लिए लगभग ₹8.88 करोड़ का कार्य दर्ज है। इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या अजमेर के अलग-अलग विकास कार्यों को एक साझा पर्यटन और पर्यावरण योजना के तहत जोड़ा जाना चाहिए।

शुभदा शक्ति का सवाल: क्या रोपवे ‘Accessible Tourism’ की मिसाल बनेगा?

इस पूरी चर्चा में एक पक्ष अक्सर पीछे छूट जाता है—दिव्यांगजन, बुजुर्ग और सीमित गतिशीलता वाले पर्यटक।

खड़ी चढ़ाई और कठिन रास्तों के कारण पहाड़ी पर्यटन स्थल हर व्यक्ति के लिए समान रूप से सुलभ नहीं होते। ऐसे में सही डिजाइन वाला रोपवे उनके लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। लेकिन इसके लिए केवल केबिन लगा देना पर्याप्त नहीं होगा। व्हीलचेयर-अनुकूल प्रवेश, रैंप, accessible toilets, सुरक्षित boarding व्यवस्था, tactile signage, प्राथमिक चिकित्सा और प्रशिक्षित कर्मचारियों जैसी सुविधाओं को शुरुआत से डिजाइन का हिस्सा बनाना होगा।

यानी असली उपलब्धि यह नहीं होगी कि अजमेर में रोपवे बन गया, बल्कि यह होगी कि अजमेर ऐसा पर्यटन ढांचा बनाए जहां बच्चा, बुजुर्ग और दिव्यांगजन—हर कोई सम्मान और सुविधा के साथ शहर की विरासत का अनुभव कर सके।

अब सवाल अजमेर से है—क्या रोपवे शहर की खूबसूरती पर बोझ बनेगा, या सोच-समझकर बनाया गया यही रोपवे अजमेर को आधुनिक और समावेशी पर्यटन की नई पहचान देगा?

आपकी क्या राय है? शुभदा शक्ति के पाठकों से हम जानना चाहेंगे—अजमेर में रोपवे बनना चाहिए तो उसके साथ कौन-कौन सी सुविधाएं अनिवार्य होनी चाहिए?

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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