चांदी 10 महीने बाद ₹2 लाख से नीचे; 4 कारोबारी सत्रों में ₹16,503 सस्ती, सोना ₹4,796 फिसला।
तेल, डॉलर और अमेरिकी ब्याज दरों की आशंका से कीमती धातुओं पर दबाव; खरीदारों को राहत, लेकिन सर्राफा कारोबार में इंतजार और अस्थिरता की चिंता।

शुभदा शक्ति न्यूज़ | 23 अक्टूबर 2026
सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट ने त्योहारी खरीदारी से ठीक पहले बाजार का रुख बदल दिया है। चांदी करीब 10 महीने बाद फिर ₹2 लाख प्रति किलो से नीचे आ गई। 23 अक्टूबर के IBJA PM बेंचमार्क के मुताबिक, चांदी ₹1,94,415 प्रति किलो और 24 कैरेट सोना ₹1,41,630 प्रति 10 ग्राम रहा। 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,29,733 प्रति 10 ग्राम था।
सुबह और शाम के भाव में अंतर
23 अक्टूबर के सुबह वाले IBJA भाव में 24 कैरेट सोना ₹1,41,448 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹1,95,027 प्रति किलो थी। 16 अक्टूबर के PM भाव से सुबह की तुलना में सोना ₹4,978 और चांदी ₹15,891 नीचे थी। शाम के PM बेंचमार्क में भाव बदलने के बाद 16 अक्टूबर के PM स्तर से सोने की कुल गिरावट ₹4,796 और चांदी की ₹16,503 रही। इसलिए दोनों गिरावट के आंकड़े अलग-अलग समय के भावों से जुड़े हैं।
रेट का आधार: ये IBJA बेंचमार्क भाव हैं। इनमें 3% GST और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं। ज्वेलर, शहर और आभूषण के अनुसार ग्राहक का अंतिम बिल अलग हो सकता है।
भाव गिरने के पीछे वैश्विक दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है। इससे बाजार में यह आशंका मजबूत हुई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर आम तौर पर सोने जैसी ऐसी संपत्तियों को कम आकर्षक बनाते हैं जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता।
दूसरा दबाव वैश्विक शेयर बाजार की बिकवाली से आया। टेक्नोलॉजी और AI कंपनियों के शेयरों में गिरावट के बाद कुछ निवेशकों को अन्य नुकसान की भरपाई के लिए सोना-चांदी बेचनी पड़ी। चांदी पर इसका असर ज्यादा दिखा, क्योंकि निवेश के साथ उसका बड़ा उपयोग औद्योगिक उत्पादन में भी है। उद्योग और विनिर्माण मांग कमजोर पड़ने की आशंका चांदी को सोने के मुकाबले अधिक अस्थिर बना सकती है।
व्यापारियों की चिंता: ग्राहक हैं, पर खरीद का फैसला टल रहा
सर्राफा कारोबारियों के लिए तेजी से बदलते भाव दोहरी चुनौती हैं। कीमत गिरने से पुराने ऊंचे भाव पर खरीदे स्टॉक का बाजार मूल्य घट सकता है; साथ ही रोज बदलते रेट पर नई खरीद, बिक्री और इन्वेंटरी का हिसाब संभालना कठिन होता है। CRISIL ने भी ज्वेलरी रिटेल क्षेत्र के लिए इन्वेंटरी रखने की लागत, कार्यशील पूंजी और ग्राहकों को आकर्षित करने वाले डिस्काउंट को मुनाफे पर दबाव डालने वाले कारकों में गिना है।
गिरते दाम से ग्राहक को राहत जरूर मिलती है, लेकिन कुछ खरीदार और नीचे भाव आने की उम्मीद में खरीद टाल देते हैं। Reuters से बात करने वाले एक बुलियन डीलर ने कहा कि त्योहारी सीजन के बावजूद चांदी की मांग अभी नहीं उभरी है और हालिया गिरावट से नुकसान झेलने के बाद कई निवेशक फिलहाल किनारे पर हैं।
सोने की बिक्री का अनुमान भी कारोबारी दबाव दिखाता है। IBJA सचिव के मुताबिक, अक्टूबर में पिछले महीने की तुलना में खरीदारी बढ़ी है, लेकिन बिक्री की मात्रा पिछले साल के अक्टूबर से करीब 11% कम रह सकती है। यह अनुमान केवल हाल की गिरावट का असर नहीं बताता; सोने का मौजूदा भाव पिछले साल के त्योहारी स्तर से अब भी ऊंचा है।
धनतेरस-दिवाली पर क्या असर पड़ सकता है?
कम भाव कुछ रुकी हुई खरीद को बाजार में वापस ला सकते हैं। Reuters के मुताबिक, दशहरा सप्ताह में कम कीमतों ने भारत में सोने की खरीद को सहारा दिया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने भी त्योहारी मांग में सुधार, दुकानों में बढ़ते फुटफॉल और रिटेलर्स की ओर से स्टॉक भरने के संकेत बताए हैं। यानी खरीदारी पूरी तरह थमी नहीं है, लेकिन ग्राहक खर्च को लेकर अधिक सावधान हैं।
इस बार मांग का स्वरूप भी बदल रहा है। भारी आभूषणों के बजाय हल्के डिजाइन, छोटे सिक्के और पुराने सोने के बदले नई ज्वेलरी जैसे विकल्प बजट में खरीदारी बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। ज्वेलर्स पुराने सोने के एक्सचेंज, आसान भुगतान, रेट-प्रोटेक्शन और मेकिंग चार्ज पर ऑफर देकर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। ऐसी योजनाएं दुकान में ग्राहक ला सकती हैं, हालांकि छूट और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव मुनाफे पर दबाव डाल सकते हैं।
आगे बाजार किस ओर जा सकता है?
निकट भविष्य में कच्चे तेल, डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों और वैश्विक शेयर बाजार की चाल पर सोने-चांदी की दिशा निर्भर करेगी। 27–28 अक्टूबर की फेड बैठक और 29 अक्टूबर को आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर भी बाजार की नजर रहेगी। यदि भाव कुछ समय स्थिर रहते हैं, तो धनतेरस, दिवाली और इसके बाद के शादी-ब्याह के लिए टली हुई खरीद लौट सकती है। अगर गिरावट और अस्थिरता जारी रहती है, तो ग्राहक इंतजार कर सकते हैं और व्यापारी नया स्टॉक सीमित रख सकते हैं।
फिलहाल बाजार का संकेत साफ है: कम भाव खरीदारों के लिए राहत हैं, लेकिन त्योहारी बिक्री में मजबूत उछाल तभी टिकेगा जब ग्राहकों को कीमतों में स्थिरता दिखे।






