देवी विजवा माता के दर पर श्रद्धालुओं की मन्नतें होती है पूरी, दिव्यांगों के शारीरिक विकार भी होते है दूर – विजवा माता का मंदिर.
बांसवाड़ा के वागड़ में स्थित विजवा मात का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ दिव्यांगों के देवी के रूप में भी जाना जाता है. माना जाता है कि यहां दिव्यांग माता देवी के दरवार में शीष नवाने आते हैं और यहां से पूरी तरह से ठीक होकर जाते हैं. बताया जा रहा है कि यह मंदिर काफी पुराना है. रियासत काल से ही इसकी देखरेख एक परिवार के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी कर रहे हैं.
जिले की वागड़ में स्थित एक ऐसा माता का मंदिर है, जो धीरे-धीरे दिव्यांगों की माता के नाम से भी पहचाना जाता है. शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर देवी विजवा माता का मंदिर अब किसी पहचान का मोहताज नहीं रहा है. हाथ-पैर का मामला हो या शरीर में अन्य कोई विकार हो देवी मां के दरबार में हाजिरी लगाने से काफी आराम मिलता है. वहीं विकार वाले अंग ठीक हो जाने के बाद इसके बदले देवी मां को लकड़ी के अंग चढ़ाए जाते हैं. माता की इस विशेषता के चलते आस-पास ही नहीं अन्य प्रदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं.
पुजारी कचरू भाई मालीवाड़ बताते है कि मंदिर की स्थापना को लेकर कोई निश्चित तिथि तो साफ नहीं है, लेकिन मंदिर परिसर में स्थित एक प्राचीन पीपल के पेड़ के नीचे राजघराने के समय से श्रद्धालु आकर पूजन करते थे। उसी समय से यह मान्यता चली आ रही है। पुजारी का कहना है कि रोग के लिए इलाज जरूरी है। लोग श्रद्धा स्वरूप आकर यहां मन्नत मांगते हैं। मंशा पूरी होने पर श्रद्धालु वही अंग लकड़ी का बनवाकर चढ़ता है जो ठीक हुआ हो।