तकनीक बनेगी दिव्यांगजनों की नई ताकत!
10 लाख दृष्टिबाधितों को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
मोबाइल की आवाज बनेगी आंखें, आधुनिक उपकरण खोलेंगे शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते; देशभर में सहायक तकनीक पहुंचाने की पहल ।

शुभदा शक्ति न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट | 10 अक्टूबर 2026
शिलांग। क्या कोई दृष्टिबाधित व्यक्ति बिना किसी की सहायता के किताब पढ़ सकता है, मोबाइल चला सकता है और अपने दैनिक कार्य स्वयं कर सकता है? आधुनिक तकनीक ने इन सवालों का जवाब देना शुरू कर दिया है। भारत में दृष्टिबाधित व्यक्तियों को तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।
मेघालय की राजधानी शिलांग में 8 अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम में आधुनिक सहायक उपकरणों, मोबाइल की सुलभ सुविधाओं और तकनीकी प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया। यह कार्यक्रम इनेबल इंडिया के ‘सॉल्यूशंस वीक 2026’ अभियान का हिस्सा था, जो 3 से 10 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है।
14 राज्यों में पहल, 10 लाख लोगों को सशक्त बनाने का लक्ष्य
इस अभियान में 14 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 17 सहयोगी केंद्रों की भागीदारी बताई गई है। इसका व्यापक उद्देश्य दस लाख दृष्टिबाधित व्यक्तियों को तकनीकी सुविधाओं और प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त बनाना है।
यह संख्या अभियान का लक्ष्य है, अब तक लाभान्वित व्यक्तियों की संख्या नहीं।
मोबाइल पढ़कर सुनाएगा किताबें और संदेश
आधुनिक स्क्रीन रीडर तकनीक मोबाइल और कंप्यूटर पर लिखी जानकारी को आवाज में बदल सकती है। इससे दृष्टिबाधित व्यक्ति संदेश पढ़ सकते हैं, ऑनलाइन अध्ययन कर सकते हैं और डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।
ब्रेल उपकरण, आवाज से संचालित सुविधाएं और वस्तुओं की पहचान करने वाले अनुप्रयोग भी स्वतंत्र जीवन में सहायक हो सकते हैं।
शिक्षा और रोजगार में खुलेंगे नए अवसर
सहायक तकनीक दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की पढ़ाई को आसान बना सकती है। उचित प्रशिक्षण मिलने पर वे कंप्यूटर संबंधी कार्य, दस्तावेज तैयार करने और डिजिटल माध्यमों से रोजगार के अवसर तलाशने में अधिक सक्षम हो सकते हैं।
हालांकि, उपकरणों की कीमत, जागरूकता की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण सुविधाओं का अभाव अब भी बड़ी चुनौतियां हैं।
शुभदा शक्ति का सवाल—तकनीक हर दिव्यांगजन तक कब पहुंचेगी?
शुभदा शक्ति का मानना है कि दिव्यांगजनों को केवल सहायता नहीं, आत्मनिर्भर बनने के अवसर मिलने चाहिए। दृष्टिबाधित व्यक्तियों के साथ बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांगता, ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी और बहुदिव्यांगता वाले व्यक्तियों की जरूरतों के अनुरूप भी तकनीक विकसित होनी चाहिए।
सरकार, सामाजिक संस्थाओं और तकनीकी कंपनियों को मिलकर सस्ते उपकरण, प्रशिक्षण तथा स्थानीय भाषाओं में सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।
क्योंकि तकनीक की वास्तविक सफलता नए आविष्कारों में नहीं, बल्कि इस बात में है कि वह कितने दिव्यांगजनों को सम्मान, स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता के साथ जीने का अवसर देती है।
शुभदा शक्ति न्यूज़ — दिव्यांगों को दुनिया और दुनिया को दिव्यांगों से जोड़ने की एक पहल।






