मौत के 6 साल बाद फिर चर्चा में सुशांत केस: बहन श्वेता का दावा—‘पैर टूटा था, आंखों पर चोट थी’

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के छह साल बाद उनकी बहन श्वेता सिंह कीर्ति के एक नए वीडियो ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। श्वेता ने दावा किया है कि उन्हें हाल में उस व्यक्ति से जुड़ी जानकारी मिली, जिसने सुशांत का पोस्टमॉर्टम किया था। उनके मुताबिक, उन्हें बताया गया कि सुशांत के पैर में फ्रैक्चर था, आंखों पर चोट थी और उन पर काफी बल प्रयोग किया गया था। कुछ रिपोर्टों में श्वेता के हवाले से “स्टन गन” के इस्तेमाल का दावा भी सामने आया है।
श्वेता ने वीडियो में क्या दावा किया?
28 सितंबर 2026 को सामने आए वीडियो संदेश में श्वेता ने कहा कि उन्हें हाल ही में पोस्टमॉर्टम से जुड़े व्यक्ति से ऐसी जानकारी मिली, जिसने उनके मन में कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पैर टूटने, आंखों पर चोट और अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने की बात कही। हालांकि, श्वेता ने वीडियो में इन नए दावों के समर्थन में कोई मेडिकल दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया और ये दावे अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
श्वेता ने अपने संदेश में अपने भाई के प्रशंसकों की भावनाओं का भी जिक्र किया। साथ ही उन्होंने कहा कि वह अपने दुख को नफरत, बदले या नाराजगी में नहीं बदलना चाहतीं और लोगों से प्रेम, विश्वास और अच्छाई बनाए रखने की अपील की।
पुराने पोस्टमॉर्टम निष्कर्ष क्या कहते थे?
यहां नए दावों और पहले सामने आए आधिकारिक निष्कर्षों के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है। 2020 में रिपोर्ट किए गए अंतिम पोस्टमॉर्टम निष्कर्षों में मौत का कारण फांसी के कारण दम घुटना (asphyxia due to hanging) बताया गया था। उस समय की रिपोर्टों के मुताबिक शरीर पर संघर्ष के निशान या बाहरी चोटें दर्ज नहीं की गई थीं।
यानी श्वेता के ताजा दावे पहले सार्वजनिक हुए पोस्टमॉर्टम निष्कर्षों से मेल नहीं खाते। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जिन कथित चोटों का श्वेता ने जिक्र किया है, उनके संबंध में कोई नया मेडिकल या फॉरेंसिक प्रमाण सामने आया है या नहीं।
CBI ने 2025 में दाखिल की थी क्लोजर रिपोर्ट
सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे। मामले की जांच बाद में CBI को सौंपी गई। मार्च 2025 में CBI ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और अपनी जांच के आधार पर इसे आत्महत्या का मामला बताया था।
नए दावों से फिर उठे सवाल
श्वेता सिंह कीर्ति के ताजा बयान ने वर्षों पुराने मामले को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है। लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर पैर टूटने, आंखों पर चोट और स्टन गन के इस्तेमाल को स्थापित तथ्य नहीं कहा जा सकता। ये फिलहाल श्वेता द्वारा बताए गए दावे हैं और इनके समर्थन में नए आधिकारिक फॉरेंसिक या जांच संबंधी प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है।
निष्कर्ष: इतने संवेदनशील मामले में नए दावों और आधिकारिक जांच निष्कर्षों के बीच स्पष्ट अंतर रखना जरूरी है। श्वेता के बयान ने नए सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन किसी अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए प्रमाणित दस्तावेज और आधिकारिक जांच रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
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