अब आतंकवादी देश मुझसे सवाल पूछेगा?’ पाकिस्तानी पत्रकार को जयशंकर का करारा जवाब, फिर मुस्कुराकर निकल गए ।

नई दिल्ली /अजमेर । विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का एक पुराना वीडियो एक बार फिर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक पाकिस्तानी पत्रकार उनसे दक्षिण एशिया में आतंकवाद को लेकर सवाल करता दिखाई देता है। इसके जवाब में जयशंकर ने बेहद स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि पत्रकार यह सवाल गलत मंत्री से पूछ रहा है।
पाकिस्तानी पत्रकार ने सवाल किया था कि दक्षिण एशिया कब तक नई दिल्ली, काबुल और पाकिस्तान से आतंकवाद फैलने की स्थिति देखता रहेगा। जयशंकर ने जवाब दिया कि पाकिस्तान के मंत्री ही बता सकते हैं कि उनका देश कब तक आतंकवाद को बढ़ावा देता रहेगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया न तो मूर्ख है और न ही यह भूली है कि आतंकवाद की जड़ें कहां हैं। आतंकवादी गतिविधियों में शामिल देशों, संगठनों और व्यक्तियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार पहचान तथा निंदा होती रही है। बातचीत को दूसरी दिशा में मोड़कर इस सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता।
जयशंकर ने पाकिस्तान को अपनी नीतियों में सुधार करने और एक अच्छे पड़ोसी की तरह व्यवहार करने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को बाकी दुनिया की तरह आर्थिक विकास, प्रगति और क्षेत्रीय सहयोग में योगदान देने का प्रयास करना चाहिए।
यह घटनाक्रम दिसंबर 2022 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़े एक कार्यक्रम के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन का है। उस दौरान जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद का “केंद्र” बताते हुए कहा था कि दुनिया सीमा पार आतंकवाद के स्रोतों और उनके पीछे सक्रिय तंत्र को अच्छी तरह पहचानती है।
वायरल हेडलाइन पर जरूरी तथ्य
सोशल मीडिया और कुछ समाचार मंचों पर इस घटना को “अब आतंकवादी देश मुझसे सवाल पूछेगा?” जैसे शीर्षक के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। हालांकि उपलब्ध विस्तृत रिपोर्टों में जयशंकर के ये सटीक शब्द दर्ज नहीं हैं। उनका प्रमाणित उत्तर था कि पत्रकार यह प्रश्न “गलत मंत्री” से पूछ रहा है और इसका जवाब पाकिस्तान के मंत्री बेहतर दे सकते हैं। इसलिए वायरल शीर्षक को उनके शब्दशः बयान के बजाय एक आक्रामक मीडिया प्रस्तुति माना जाना चाहिए।
जयशंकर का यह जवाब भारत की उस घोषित नीति को रेखांकित करता है, जिसके अनुसार आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंध साथ-साथ नहीं चल सकते। वीडियो भले ही पुराना हो, लेकिन आतंकवाद पर उनका दोटूक अंदाज इसे दोबारा चर्चा में ले आया है।
निष्कर्ष
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप करने से पहले प्रत्येक देश को अपनी नीतियों और भूमिका का ईमानदारी से आकलन करना चाहिए। डॉ. एस. जयशंकर का जवाब भारत की आतंकवाद के प्रति सख्त नीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसके मुखर कूटनीतिक रुख को दर्शाता है। हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच स्थायी शांति के लिए आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई, जवाबदेही और सार्थक संवाद—तीनों आवश्यक हैं।
हमारा सुझाव है कि पाकिस्तान को आतंकवादी संगठनों और उनके वित्तीय नेटवर्क के विरुद्ध पारदर्शी एवं विश्वसनीय कार्रवाई करनी चाहिए। दोनों देशों के मीडिया को भी सनसनीखेज प्रस्तुति के बजाय सत्यापित तथ्यों और जिम्मेदार पत्रकारिता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आप इस पूरे घटनाक्रम और जयशंकर के जवाब को किस नजरिए से देखते हैं? अपनी राय और सुझाव कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।






