दिव्यांग ज्ञान सिंह ने फर्श से अर्श तक बनाई अपनी पहचान
सिरसा। गांव भुर्टवाला के ज्ञान सिंह ने यह साबित कर दिया कि हौसले अगर बुलंद हों तो दिव्यांगता जैसी बाधाएं भी सफलता के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकतीं। एक पैर में पोलियो होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के बल पर भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर लगभग आठ पदक हासिल कर युवाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल पेश की।

ज्ञान सिंह वर्तमान में शिक्षा विभाग में लिपिक पद पर कार्यरत हैं। बचपन में जब लोग उनके माता-पिता को ताने देते थे कि तेरा बेटा अब ठीक नहीं होगा, तब उन तानों ने ही ज्ञान सिंह को अंदर से मजबूत बना दिया। यही बातें उनकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट साबित हुईं और उन्होंने खेल की ओर रुख किया। हालांकि उन्हें कभी प्रोफेशनल कोचिंग नहीं मिल पाई, इसका मलाल उन्हें आज भी है।
ज्ञान सिंह की उपलब्धियां
- – स्टेट लेवल गेम्स में जीते पदक
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– 2014 में फरीदाबाद में स्वर्ण पदक जीता
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– 2015 में अंबाला में रजत पदक जीता
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– 2016 में फरीदाबाद में स्वर्ण पदक जीता
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– राष्ट्रीय स्तरीय खेलों में जीते पदक
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– 2016 में जयपुर में कांस्य पदक जीता
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– 2017 में पंचकूला में कांस्य पदक जीता
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– 2019 में तमिलनाडु में स्वर्ण पदक जीता
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– 2021 में बंगलूरू में कांस्य पदक जीता
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– 2019 में थाईलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ओपन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता