दिव्यांग भी चला सकते हैं मोटरबाइक, उनका भी बनेगा ड्राइविंग लाइसेंस, जानिए क्या है प्रक्रिया
सरकारी आदेशों का पालन करते हुए विकलांग लोगों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करना बहुत आसान हो गया है, इतना ही नहीं आप व्यावहारिक रूप से किसी भी कार को ‘Disability friendly’ भी बना सकते है|

भारत में ड्राइविंग लाइसेंस एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर हम चाहे कितनी भी बातें आपको बता दें, यह विषय कभी खत्म नहीं होनें वाला है। खैर, आज डीएल पर हम फिर से एक बड़ा अपडेट लेकर आएं हैं। दरसअल, आप परिचित हैं, कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए बड़ी संख्या में लोग प्रयास कर रहे हैं। विशेष रूप से विकलांग व्यक्तियों को डीएल बनवानें को लेकर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
जल्द होगा Motor Vehicle Act में बदलाव
बता दें, शारीरिक रूप से विकलांग लोगों द्वारा उपयोग के लिए डिज़ाइन किए गए वाहन को अमान्य कैरिज के रूप में जाना जाता है, और जल्द ही ऐसे वाहनों को मोटर व्हीकल एक्ट में “Adapted Vehicle” के नाम से संबोधित किया जा सकता है। अगर आप भी इस तरह की समस्या से परेशान हैं, तो हमारा यह लेख आपके लिए है। आइए बताते हैं, कि कैसे आप डीएल को बिना परेशानी के प्राप्त कर सकते है
सबसे पहले अपने लिए वाहन को करें अपग्रेड
सरकारी आदेशों का पालन करते हुए आज विकलांग लोगों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करना बहुत आसान हो गया है। आप व्यावहारिक रूप से किसी भी कार को ‘विकलांगता के अनुकूल ‘Disability friendly’ बना सकते हैं, इसके अलावा कुछ कंपनियों भी अब विकलांग लोगों के लिए कार को अपग्रेड करने का काम करती हैं।
तो सबसे पहले अपने लायक वाहन को तलाश कर आप कागजी कार्रवाई, जैसे पता प्रमाण, आईडी प्रमाण, कार बीमा, आदि के साथ आरटीओ में जाएं (अधिक जानकारी के लिए आप अपने स्थानीय क्षेत्र की आरटीओ वेबसाइट पर जा सकते हैं)। वहां आपको अमान्य कैरिज के रूप में सूचीबद्ध वाहन की श्रेणी के साथ एक फॉर्म 20 भी लेना होगा।

RTO में इन दस्तावेजों का कराएं निरीक्षण
इसके बाद विकलांगता आईडी कार्ड और विकलांगता प्रमाण पत्र, दो कागजों पर चेसिस नंबर की दो प्रतियां (पेंसिल स्केचिंग द्वारा किया गया), और एक कवरिंग पत्र (जिसमें आरटीओ से आपके ऑटोमोबाइल को अमान्य कैरिज के रूप में पंजीकृत करने और कर छूट के लिए अनुरोध किया गया है।) इन सभी दस्तावेजों को लेकर आप आरटीओ में अपने वाहन का निरीक्षण करने के लिए दें।
इसके बाद फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया में जाकर आगे बढ़ें। याद रहे कि विकलांग लोगों से किसी भी पंजीकरण शुल्क का भुगतान नहीं लिया जाता है। क्योंकि आपको Road Tax में भी छूट का प्रवाधान है। एक बार जब कागजी कार्रवाई कार्यालय में स्वीकार कर ली जाती है, तो आपको आरसी बुक/कार्ड लेने के लिए एक सप्ताह में वापस आने के लिए कहा जाएगा।
नोट: अमान्य कैरिज में “अपनी कार बदलने” के लिए यहां लगभग 120 रुपए के शुल्क की आवश्यकता हो सकती है। लेकिन जांच लें कि वाहन का वर्ग अमान्य कैरिज है, और रंग, इंजन और ईंधन सही लिखे हों।

किसी भी देश में किसी वाहन को चलाने के लिए वहां के लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत होती है. बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाना एक कानूनी अपराध होता है. भारत में सामान्य तौर पर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कुछ नियम कायदों का पालन करना होता है.
सबसे पहले अपनी गाड़ी को बदलना होगा
दिव्यांग लोगों के लिए सामान्य गाड़ी चलाना कठिन काम होता है. लेकिन वह मोडिफाइड व्हीकल्स का आसानी से उपयोग कर सकते हैं. दिव्यांगजन अपनी कार या अपनी दो पहिया वाहन को अपनी सहूलियत के अनुसार डिसेबिलिटी फ्रेंडली बना सकते हैं. ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन देने से पहले आपको अपने वाहन को डिसेबिलिटी फ्रेंडली बनाने की प्रक्रिया को पूरा कर लेना चाहिए. पहले इस तरह के वाहनों को इनवेलिड कैरिज यानी अमान्य कैरिज कहा जाता था. लेकिन अब इसे एडेप्टेड व्हीकल यानी अनुकूलित वहां कहा जाता है.
नार्मल ड्राइविंग लाइसेंस की तरह होती बाकी प्रोसेस
जब आप अपने अडॉप्टेड व्हीकल ऑप्शन के जरिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का आवेदन देते हैं. उसके बाद सामान्य लाइसेंस की तरह ही आपको ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई करना होता है पहले आपको लर्निंग लाइसेंस दिया जाता है. इसके एक महीने बाद ही आप ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इसके लिए आपको आरटीओ ऑफिस जाना होता है अपने एडेप्टेड व्हीकल के साथ और फिर वहां जाकर आरटीओ ऑफीसर के सामने आपको गाड़ी चला कर दिखानी होती है उसके बाद लाइसेंस दे दिया जाता है.
यह दस्तावेज होते हैं जरूरी | दिव्यांग जनों को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आरटीओ दफ्तर में कुछ दस्तावेज जमा करने होते हैं. जिनमें उनका फिजिकल डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट यानी विकलांगता प्रमाण पत्र होता है. इसके साथ ही विकलांगता आईडी. उनके एडेप्टेड व्हीकल की चेसिस नंबर की दो कॉपी. बता दें एडेप्टेड व्हीकल के जरिए ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन देने वालों लोगों का टैक्स माफ होता है. इसके साथ ही टोल टैक्स में भी छूट मिलती है.