
राजस्थान की राजनीति में एक ऐसा नाम, जो सादगी, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक बन गया – हरिदेव जोशी।
17 दिसंबर 1920 को बांसवाड़ा ज़िले के खांदू गांव में जन्मे हरिदेव जोशी न केवल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की ज़िम्मेदारी निभाई — वह भी तब, जब उनका बायाँ हाथ पूरी तरह कट चुका था।
शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद, उन्होंने यह साबित कर दिया कि राजनीति में असली ताकत हौसले और नीयत की होती है, न कि शरीर की क्षमता की।
उनकी पूरी राजनीतिक यात्रा कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ी रही — और लोगों ने अक्सर यह कहते सुना:
“एक हाथ वाला नेता… जिसने दशकों तक हाथ वाली पार्टी को संभाला!”
उनकी प्रशासनिक क्षमता, संवेदनशीलता और जनसंपर्क कौशल उन्हें जनता से जोड़ता रहा।
जोशी जी का जीवन आज के नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है — खासकर तब, जब राजनीति में मूल्य, संघर्ष और सेवा भावना धीरे-धीरे गौण होते जा रहे हैं।
हरिदेव जोशी आज भी राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में उस अध्याय की तरह हैं, जिसे पढ़कर नई पीढ़ी हिम्मत और निष्ठा सीख सकती है।
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📌 मुख्य बिंदु संक्षेप में:
जन्म: 17 दिसंबर 1920, खांदू (बांसवाड़ा)
तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री
बायाँ हाथ कटने के बावजूद प्रभावशाली राजनीतिक जीवन
स्वतंत्रता सेनानी व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
सादगी और प्रतिबद्धता की मिसाल