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दिव्यांग बच्चों का अनूठा तोहफा:मथुरा में बनाईं सैनिकों और बांके बिहारी के लिए खास राखियां

मथुरा में दिव्यांग और मूक बधिर बच्चे बना रहे खूबसूरत राखियां, बांके बिहारी और फौजियों को करेंगे समर्पित

भाई बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन बेहद करीब है। इस दौरान बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर रक्षा का वचन लेती हैं। लेकिन जब यही रक्षा सूत्र दिव्यांगो द्वारा बांके बिहारी और सरहद पर तैनात फौजियों के लिए बना गया हो तो इसमें प्यार और आस्था और गहरी हो जाती है। दरअसल, मथुरा में दिव्यांग और मूक बधिर बच्चे राखियां बना रहे हैं और इनके द्वारा बनाई गईं राखियां भगवान बांके बिहारी और गिर्राज जी और सेना के जवानों को अर्पित की जाएंगी।

मथुरा में दिव्यांगों के लिए कार्यरत संस्था कल्याण करोति के विशेष बच्चों ने रक्षाबंधन को यादगार बनाने की तैयारी की है। संस्था के दिव्यांग और मूक-बधिर बच्चों ने सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए खास राखियां बनाई हैं।कल्याण करोति में वर्तमान में 153 दिव्यांग और मूक-बधिर बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इससे उनकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है। दिव्यांग और मुख बधिर बच्चे राखी बनाकर समाज की मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं और ये दिव्यांग बच्चे इन राखियों को बांके बिहारी जी, गिर्राज महाराज और सरहद पर तैनात फौजियों के लिए समर्पित करेंगे

इन बच्चों को बना रहे आत्मनिर्भर 
वहीं इस समाज सेवी संस्था में सदस्य बृजेश शर्मा ने बताया कि कल्याण करोति में करीब 153 दिव्यांग और मूक बधिर बच्चे पढ़ते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह इन बच्चों को वोकेशनल ट्रेनिंग भी देते हैं, जिससे यह बच्चे बाकी बच्चों की तरह समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें और आने वाले समय में आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने बताया कि जब यह दिव्यांग बच्चे इस तरह की मेहनत करते हैं तो समाज को एक संदेश जाता है कि यह बच्चे भी बाकी बच्चों की तरह से कार्य कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन  सकते हैं।

संस्था के एक सदस्य के अनुसार, इन विशेष बच्चों की मेहनत समाज को एक सकारात्मक संदेश देती है। यह दर्शाता है कि दिव्यांग बच्चे भी सामान्य बच्चों की तरह कुशलतापूर्वक कार्य कर सकते हैं।

बच्चों द्वारा बनाई गई राखियां सुंदरता के साथ-साथ देशभक्ति की भावना को भी प्रदर्शित करती हैं। इस पहल से दिव्यांग बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है। साथ ही, उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उचित मार्गदर्शन मिलने पर वे समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदार बन सकते हैं।

SHUBHDA SHAKTI
Author: SHUBHDA SHAKTI

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