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“हौसलों की गेंद से इतिहास की ओर”

हौसलों की गेंद से इतिहास रचने की तैयारी! एशियन पैरा गेम्स में भारत के सचिन और अंजलि दिखाएंगे दम

बोच्चिया खेल में भारत को पहले पदक की उम्मीद, गंभीर शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के लिए खुल रहे अंतरराष्ट्रीय सफलता के नए रास्ते

शुभदा शक्ति न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट

नई दिल्ली/ अजमेर । शारीरिक चुनौतियां कितनी भी गंभीर क्यों न हों, प्रतिभा और मजबूत इच्छाशक्ति के सामने सफलता के रास्ते खुल सकते हैं। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी सचिन चमारिया और अंजलि देवी इसी संदेश के साथ बोच्चिया खेल में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह ऐसा खेल है, जिसमें शारीरिक ताकत से अधिक एकाग्रता, रणनीति और सटीक निशाने का महत्व होता है।

बोच्चिया में भारत को पहले पदक की उम्मीद

भारतीय खिलाड़ी सचिन चमारिया पुरुष व्यक्तिगत बीसी-3 और अंजलि देवी महिला व्यक्तिगत बीसी-3 स्पर्धा में चुनौती पेश कर रहे हैं। दोनों मिश्रित युगल प्रतियोगिता में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत ने पिछले एशियन पैरा गेम्स में बोच्चिया में भाग लिया था, लेकिन पदक हासिल नहीं कर सका था। ऐसे में इस बार दोनों खिलाड़ियों से देश को नई उम्मीदें हैं।

क्या है बोच्चिया, कैसे खेलते हैं दिव्यांग खिलाड़ी?

बोच्चिया एक अंतरराष्ट्रीय पैरा खेल है, जिसे विशेष रूप से गंभीर शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के लिए विकसित किया गया है। इसमें लाल और नीले रंग की गेंदों को सफेद लक्ष्य गेंद के अधिकतम करीब पहुंचाना होता है। सबसे सटीक निशाना लगाने वाला खिलाड़ी या टीम निर्धारित नियमों के अनुसार अंक प्राप्त करती है।

इस खेल की खासियत यह है कि जिन खिलाड़ियों को हाथों से गेंद फेंकने में कठिनाई होती है, वे विशेष रैंप और सहायक उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं। बीसी-3 श्रेणी में खिलाड़ी अपने निर्देशों के अनुसार सहायक की मदद से गेंद को लक्ष्य तक पहुंचाते हैं।

सचिन की जीत ने बढ़ाया भारतीय दल का उत्साह

उपलब्ध खेल रिपोर्टों के अनुसार, सचिन चमारिया ने अपने शुरुआती मुकाबले में संयुक्त अरब अमीरात के खिलाड़ी को 8-4 से हराकर सकारात्मक शुरुआत की। अब भारतीय खिलाड़ियों के सामने आगे के मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए पदक की ओर बढ़ने की चुनौती है।

विशेष बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकता है बोच्चिया

भारत में बोच्चिया जैसे खेलों के प्रति जागरूकता अभी सीमित है। विशेष विद्यालयों, पुनर्वास केंद्रों और खेल संस्थानों में अनुकूलित खेल गतिविधियों को बढ़ावा देकर शारीरिक दिव्यांगता वाले बच्चों को खेलों से जोड़ा जा सकता है।

उपयुक्त उपकरण, प्रशिक्षित मार्गदर्शक और बाधारहित खेल परिसर मिलने पर अनेक प्रतिभाशाली दिव्यांग खिलाड़ी अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकते हैं। इससे आत्मविश्वास, सहभागिता और स्वतंत्रता को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।

शुभदा शक्ति का संदेश—दिव्यांगता नहीं, प्रतिभा को मिले पहचान

शुभदा शक्ति का मानना है कि दिव्यांग खिलाड़ियों को सहानुभूति से अधिक उचित प्रशिक्षण, संसाधन और समान अवसरों की आवश्यकता है। सचिन और अंजलि जैसे खिलाड़ी समाज को यह संदेश देते हैं कि खेलों की दुनिया में हर व्यक्ति की प्रतिभा के लिए स्थान होना चाहिए।

अब सवाल यह है कि क्या भारत के विशेष विद्यालयों और खेल संस्थानों में बोच्चिया जैसे समावेशी खेलों को पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं?

शुभदा शक्ति न्यूज़ — दिव्यांगों को दुनिया और दुनिया को दिव्यांगों से जोड़ने की एक पहल।

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Author: APOORV SEN

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