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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा: 50 हजार की सुपारी, विदेश में बसाने का लालच और नेपाल भागने की साजिश!

मुंबई में अभिनेता की कार पर गोलियां चलाने के बाद राजस्थान के कोटा में पकड़े गए तीन संदिग्ध, एक नाबालिग; लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कथित कनेक्शन और युवाओं की भर्ती कराने वाले नेटवर्क की जांच तेज।

शुभदा शक्ति न्यूज़ | मुंबई/कोटा, 19 अक्टूबर 2026। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वारदात को अंजाम देने के लिए संदिग्धों को कथित तौर पर 50 हजार रुपये अग्रिम दिए गए थे। उन्हें अधिक पैसे और विदेश में बसाने का लालच दिए जाने की बात भी शुरुआती रिपोर्टों में सामने आई है। हालांकि, इन दावों की पूरी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मुंबई में रविवार शाम हुई फायरिंग के बाद फरार तीन संदिग्धों को सोमवार सुबह राजस्थान के कोटा में पकड़ लिया गया। इनमें एक नाबालिग भी शामिल है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संदिग्ध देश छोड़कर नेपाल भागने की योजना बना रहे थे। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किसने इन युवाओं को इतनी गंभीर वारदात के लिए तैयार किया और इसके पीछे कौन सा आपराधिक नेटवर्क सक्रिय है।

जुहू में टाइगर श्रॉफ की कार पर बरसाईं गोलियां

घटना रविवार, 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई। टाइगर श्रॉफ एक फुटबॉल क्लब से निकल रहे थे, तभी उनकी कार पर फायरिंग की गई। इस हमले में अभिनेता सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके चालक और एक ऑटो रिक्शा चालक के घायल होने की खबर है।

वारदात के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच ने सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य सुरागों के आधार पर उनकी तलाश शुरू की। जांच के दौरान राजस्थान की ओर भाग रहे संदिग्धों की जानकारी मिलने पर पुलिस ने कोटा में कार्रवाई की तैयारी की।

कोटा में पुलिस का जाल, ट्रेन से पकड़े गए तीन संदिग्ध

मुंबई पुलिस से मिली सूचना के बाद राजस्थान पुलिस और एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स सक्रिय हुई। कोटा पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम के अनुसार, सोमवार सुबह संदिग्धों के ट्रेन से गुजरने की सूचना मिली थी। इसके बाद रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई।

पुणे-जयपुर एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे तीन संदिग्धों को संयुक्त कार्रवाई में पकड़ लिया गया। शुरुआती जांच में उनके दिल्ली होते हुए नेपाल भागने की योजना का संकेत मिला है। पुलिस अब उनके यात्रा मार्ग, संपर्कों और फरारी की योजना तैयार करने वालों का पता लगा रही है।

50 हजार की कथित सुपारी और विदेश में बसाने का लालच

इस मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू कथित आर्थिक सौदे से जुड़ा है। पुलिस सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, तीनों संदिग्धों को वारदात के लिए कुल 50 हजार रुपये अग्रिम दिए गए थे। इसके अलावा अच्छे पैसे और विदेश में बसाने का लालच दिए जाने की बात भी सामने आई है।

हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि रकम किसने दी, किस माध्यम से पहुंचाई गई और प्रत्येक संदिग्ध की क्या भूमिका थी। पुलिस इन पहलुओं की जांच कर रही है।

आरोपियों में नाबालिग और बाइक टैक्सी चालक भी शामिल

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, पकड़े गए लोगों में हरियाणा के सोनीपत का 18 वर्षीय रेहान, बिहार के बेगूसराय का 22 वर्षीय ऋतिक कुमार उर्फ रोशन और हरियाणा का एक 17 वर्षीय नाबालिग शामिल है। ऋतिक मुंबई में बाइक टैक्सी चालक के रूप में काम करता था।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि तीनों एक-दूसरे के संपर्क में कैसे आए, उन्हें वारदात के निर्देश किसने दिए और हमले से पहले अभिनेता की गतिविधियों की निगरानी किसने की थी। नाबालिग की भूमिका की जांच किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के तहत की जाएगी।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कनेक्शन? जांच के घेरे में अनिल पंडित

मामले में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से कथित संबंधों की भी जांच की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका में मौजूद बताए जा रहे अनिल पंडित की संभावित भूमिका की पड़ताल हो रही है। गिरोह से जुड़ी बताई जा रही एक सोशल मीडिया पोस्ट में हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा भी सामने आया है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने का दावा अपने आप में किसी व्यक्ति या गिरोह की आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। पुलिस संबंधित पोस्ट की प्रामाणिकता, संदिग्धों के संपर्क और वारदात के पीछे वास्तविक उद्देश्य की जांच कर रही है।

असली सवाल: युवाओं को अपराध की दुनिया में कौन धकेल रहा है?

इस पूरे मामले ने एक गंभीर सामाजिक सवाल खड़ा कर दिया है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि कम उम्र के युवाओं को पैसों और विदेश में बेहतर जिंदगी का लालच देकर फायरिंग जैसी वारदात में शामिल किया गया, तो यह संगठित अपराध की भर्ती प्रणाली का चिंताजनक उदाहरण होगा।

पुलिस के सामने अब केवल हमलावरों की पहचान का सवाल नहीं है, बल्कि उन्हें निर्देश देने वालों, आर्थिक मदद पहुंचाने वालों और अपराध के बाद सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने वाले संभावित नेटवर्क की पहचान करना भी बड़ी चुनौती है।

फिलहाल तीन संदिग्धों के पकड़े जाने के बाद जांच आगे बढ़ रही है। हमले की साजिश, कथित सुपारी, गिरोह से संबंध और विदेश भागने की योजना की वास्तविकता पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

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Author: sshakti

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