बरेली के 27 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल सूरज कुशवाह ने बनाया ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम, पुलिस की नाकेबंदी पार कर जंतर-मंतर पहुंचना खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती
शुभदा शक्ति न्यूज़। देश में युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों के बीच ‘जंतर-मंतर चलो’ नाम का ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी 27 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल सूरज कुशवाह द्वारा तैयार यह गेम विरोध-प्रदर्शनों की वास्तविक परिस्थितियों को हास्य और राजनीतिक व्यंग्य के माध्यम से डिजिटल दुनिया में प्रस्तुत करता है। इस गेम की सबसे दिलचस्प बात यह है कि खिलाड़ी अपनी पसंद के अनुसार प्रदर्शनकारी या पुलिसकर्मी की भूमिका निभा सकते हैं।
पुलिस की नाकेबंदी पार कर जंतर-मंतर पहुंचने की चुनौती
गेम में प्रदर्शनकारी बनने वाले खिलाड़ियों का लक्ष्य पुलिस की नाकेबंदी और रास्ते में आने वाली बाधाओं को पार करते हुए जंतर-मंतर तक पहुंचना है। दूसरी ओर पुलिसकर्मी की भूमिका निभाने वाले खिलाड़ियों को प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकना होता है। गेम में इंटरनेट बाधित होने, रास्ते बंद होने और सुरक्षा अवरोध जैसी परिस्थितियों को भी शामिल किया गया है। ये चुनौतियां खेल को रोचक बनाने के साथ विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सामने आने वाली समस्याओं पर व्यंग्य भी करती हैं।
बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर डिजिटल कटाक्ष
देश में रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और मतदाता सूची से जुड़े विवादों जैसे मुद्दों पर लगातार राजनीतिक बहस होती रही है। ऐसे माहौल में यह गेम युवाओं की चिंताओं और विरोध की संस्कृति को एक अलग डिजिटल रूप में सामने लाता है। गेम के माध्यम से गंभीर सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को मनोरंजन के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।
सोशल मीडिया से गेमिंग तक पहुंचा विरोध का नया अंदाज
आज के डिजिटल युग में युवा अपनी बात रखने के लिए केवल धरना-प्रदर्शन या सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं हैं। मीम, वीडियो और ऑनलाइन गेम भी सामाजिक एवं राजनीतिक अभिव्यक्ति के नए माध्यम बन रहे हैं। ‘जंतर-मंतर चलो’ इसी बदलती डिजिटल संस्कृति का एक उदाहरण है, जहां मनोरंजन के साथ गंभीर सामाजिक सवालों को भी उठाया जा रहा है।
शुभदा शक्ति का दृष्टिकोण: तकनीक बने अभिव्यक्ति और जागरूकता का माध्यम
डिजिटल तकनीक समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर युवाओं और दिव्यांगजनों को अपनी आवाज उठाने के नए अवसर दे सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे डिजिटल मंच अधिक सुलभ, समावेशी और जिम्मेदार बनें, ताकि हर व्यक्ति सामाजिक मुद्दों पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके।
आपकी राय क्या है? क्या ऑनलाइन गेम सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं? अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।
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