कप्तानी छोड़ी, दिल की बात कह गईं हरमनप्रीत कौर: बोलीं— टीम के लिए कई बार खुद और अपने खेल को पीछे रखा ।

नई दिल्ली / अजमेर । भारतीय महिला क्रिकेट के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है। दिग्गज क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सभी फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है। कप्तानी से विदाई लेते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें वर्षों के संघर्ष, त्याग, जीत, हार और टीम के प्रति अपने समर्पण को खुलकर सामने रखा।
“टीम को अपना सबकुछ दिया”
हरमनप्रीत ने कहा कि कप्तानी छोड़ने का फैसला उनके लिए आसान नहीं था। इस सफर से वर्षों की यादें, भावनाएं और त्याग जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय महिला क्रिकेट और टीम के लिए उन्होंने अपना समय और ऊर्जा ही नहीं, बल्कि कई मौकों पर अपने व्यक्तिगत खेल और निजी महत्वाकांक्षाओं को भी पीछे रखा।
उनका कहना था कि कप्तान के रूप में टीम की जरूरत हमेशा उनकी व्यक्तिगत जरूरतों से ऊपर रही। कई बार उन्हें ऐसे कठिन फैसले भी लेने पड़े, जिन्हें हर कोई नहीं समझ पाया और जिनकी व्यक्तिगत कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ी। लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा टीम को मजबूत बनाना और दूसरी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर देना रहा।
हार, आलोचना और जीत—सब देखा
हरमनप्रीत के कप्तानी के सफर में कई उतार-चढ़ाव आए। उन्होंने मुश्किल हार, आलोचना और सवालों का सामना किया तो दूसरी ओर ऐतिहासिक जीत और उपलब्धियों का जश्न भी मनाया।
उनकी कप्तानी में भारत ने नवंबर 2025 में अपना पहला महिला वनडे वर्ल्ड कप जीता, जबकि हाल ही में भारतीय महिला टीम ने टी20 क्रिकेट में लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
आंकड़े भी हरमनप्रीत के कप्तानी दौर की मजबूती बताते हैं। उन्होंने 155 टी20 इंटरनेशनल मैचों में भारत की कप्तानी की, जिनमें टीम ने 92 मुकाबले जीते। वनडे में उनकी कप्तानी में भारत ने 51 में से 30 मुकाबले जीते, जबकि टेस्ट में पांच मैचों में चार जीत दर्ज की।
कप्तानी खत्म, लेकिन सफर जारी
हरमनप्रीत ने साफ किया कि कप्तानी से विदाई उनके क्रिकेट सफर का अंत नहीं है। उन्होंने साथी खिलाड़ियों, कोच, सपोर्ट स्टाफ, मैनेजमेंट, BCCI, परिवार और प्रशंसकों को धन्यवाद दिया।
उनके संदेश का सबसे महत्वपूर्ण भाव यही रहा—कप्तानी की जिम्मेदारी समाप्त हो सकती है, लेकिन भारतीय क्रिकेट के प्रति उनका प्यार और मैदान पर उनका सफर अभी जारी है।
हरमनप्रीत का कप्तानी छोड़ना सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के उस दौर का समापन है जिसमें उन्होंने टीम को आगे रखते हुए कई बार अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पीछे छोड़ा। अब मैदान पर वह बिना कप्तानी के दबाव के एक बार फिर अपने खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।






