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जी , सुना क्या ?? “पिता का त्याग, बेटी की सुनहरी उड़ान—Asian Games में दो गोल्ड”

खेत से गोल्ड तक: किसान की बेटी ने दुनिया में लहराया तिरंगा”

किसान पिता के त्याग से Asian Games के स्वर्ण तक—21 वर्षीय तीरंदाज ने दिलाया भारत को LA 2028 Olympic quota भी

नई दिल्ली/नागोया/ अजमेर  । कभी जिस बेटी के सपने को पूरा करने के लिए एक किसान पिता ने परिवार का rice harvester बेच दिया और कर्ज लिया, उसी बेटी ने अब Asian Games 2026 में भारत के लिए दो स्वर्ण पदक जीतकर उस संघर्ष को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया है। तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले के सुल्तानपुर गांव की 21 वर्षीय चिकिता तानीपर्थी (Chikitha Taniparthi) की कहानी आज खेल जगत से कहीं आगे मेहनत, परिवार के विश्वास और सपनों की कहानी बन गई है।

🏹 कराटे शुरू हुआ सफर, हाथ में आया धनुष

चिकिता शुरुआत में तीरंदाज नहीं थीं। स्कूल के दिनों में उनकी रुचि कराटे में थी और उन्होंने ब्लैक बेल्ट भी हासिल की थी। उनके पिता श्रीनिवास राव, जो किसान हैं, चाहते थे कि उनकी बेटी किसी individual sport में आगे बढ़े। बाद में चिकिता ने archery की ओर कदम बढ़ाया और 2018 से इसे गंभीरता से अपनाया।

लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी आसान या सस्ती नहीं थी। अच्छे compound bow और training equipment के लिए बड़ी रकम की जरूरत थी। परिवार ने कर्ज लिया और उनके पिता ने परिवार का rice harvester तक बेच दिया ताकि आर्थिक तंगी बेटी के सपने के रास्ते में न आए।

🥇 Asian Games में Golden Double

वर्षों की मेहनत का परिणाम Asian Games 2026 में सामने आया। चिकिता ने भारत की women’s compound team के साथ gold जीता और फिर Sahil Jadhav के साथ mixed compound team event में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारत ने इन खेलों में तीनों compound team titles जीतकर clean sweep किया।

Mixed-team final बेहद रोमांचक रहा। भारत और South Korea 157-157 से बराबर रहे, जिसके बाद मुकाबला shoot-off में पहुंचा। भारतीय जोड़ी ने 20 का स्कोर किया जबकि Korean pair ने 19 बनाया और gold भारत के नाम हो गया।

🇮🇳 Gold से आगे—भारत को मिला LA 2028 का रास्ता

इस जीत की अहमियत सिर्फ Asian Games gold तक सीमित नहीं है। चिकिता और साहिल की mixed-team victory ने भारत को Los Angeles 2028 Olympics के लिए compound mixed-team quota भी दिलाया। Compound archery LA 2028 में अपना Olympic debut करने जा रही है।

❤️ एक पिता के विश्वास की जीत

चिकिता की उपलब्धि एक महत्वपूर्ण संदेश देती है—प्रतिभा बड़े शहर या संपन्न परिवार की मोहताज नहीं होती। कभी संसाधनों की कमी से जूझ रहे एक किसान परिवार ने बेटी की क्षमता पर भरोसा किया; आज वही बेटी Asian Games podium पर भारत का तिरंगा ऊंचा कर रही है।

शुभदा शक्ति के नजरिए से यह कहानी केवल दो गोल्ड मेडल की नहीं, बल्कि अवसर और विश्वास की ताकत की कहानी है। समाज जब किसी बच्चे की क्षमता को पहचानकर उसे सही अवसर देता है, तो उसकी परिस्थितियां उसकी संभावनाओं की सीमा नहीं रह जातीं।

चिकिता और उनके पिता की यह कहानी हमें एक सवाल भी देती है—क्या हम अपने आसपास मौजूद हर प्रतिभा, विशेषकर संसाधनों से वंचित और दिव्यांग बच्चों को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर दे रहे हैं?

शुभदा शक्ति — दिव्यांगों को दुनिया और दुनिया को दिव्यांगों से जोड़ने की एक पहल।
APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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