UGC की डेडलाइन आज: क्या देश के विश्वविद्यालय वास्तव में दिव्यांगों के लिए सुलभ हैं?
प्रवेश से लेकर कैंपस तक—दिव्यांग विद्यार्थियों के अधिकारों पर विश्वविद्यालयों से मांगा हिसाब

नई दिल्ली। देश में उच्च शिक्षा को समावेशी बनाने की दिशा में 30 सितंबर 2026 एक महत्वपूर्ण तारीख है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को दिव्यांगजनों के अधिकारों से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन पर जानकारी देने को कहा है। संस्थानों को दिव्यांग विद्यार्थियों के प्रवेश, शिक्षकों व गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों की भर्ती तथा विद्यार्थियों को दी गई fellowship और scholarship से संबंधित आंकड़े UGC के Universities Activity Monitoring Portal (UAMP) पर जमा करने हैं। इसकी अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की गई है।
लेकिन असली सवाल केवल आंकड़े जमा करने का नहीं है—क्या देश के विश्वविद्यालय वास्तव में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए समान अवसर और सुगम वातावरण उपलब्ध करा रहे हैं?
सिर्फ रैंप बना देना Accessibility नहीं
UGC की Accessibility Guidelines के मुताबिक उच्च शिक्षण संस्थानों में दिव्यांग व्यक्ति के लिए admission से लेकर course पूरा होने तक प्रभावी accessible mechanism होना चाहिए। इसका उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जिसमें दिव्यांग विद्यार्थी बिना बाधा उच्च शिक्षा में भाग ले सकें।
इसलिए accessibility को केवल भवन में ramp या lift होने तक सीमित नहीं देखा जा सकता। शिक्षण सामग्री, डिजिटल प्लेटफॉर्म, परीक्षा व्यवस्था, आवश्यक reasonable accommodation और संस्थागत सहायता जैसे पहलू भी वास्तविक inclusion के लिए महत्वपूर्ण हैं।
प्रवेश और रोजगार का भी देना होगा विवरण
रिपोर्टों के अनुसार UGC ने institutions से 2024-26 के दौरान PwD category में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों, नियुक्त teaching और non-teaching staff तथा PwD विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई गई scholarships और fellowships की जानकारी मांगी है।
UGC ने RPwD Act, 2016 के Section 32 से जुड़े higher-education reservation provisions के अनुपालन पर भी जोर दिया है। संस्थानों से accessibility action plan तैयार करने, Equal Opportunity Cell के प्रभावी संचालन और दिव्यांगजनों की रोजमर्रा की आवश्यकताओं को संबोधित करने वाली institutional mechanisms पर ध्यान देने को कहा गया है।
नियम और वास्तविकता के बीच कितना अंतर?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि disability-related reservation और accessibility को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल ही में University of Hyderabad के PhD admissions में PwBD reservation के अनुपालन से जुड़ा मामला UGC और Chief Commissioner for Persons with Disabilities के समक्ष आया। आधिकारिक CCPD रिकॉर्ड में शिकायत में reservation, accessibility, reasonable accommodation और disability-related institutional mechanisms को लेकर चिंताएं दर्ज हैं।
ऐसे मामले बताते हैं कि नीति बनाने के साथ-साथ उसका प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
शुभदा शक्ति का सवाल
शुभदा शक्ति का मानना है कि उच्च शिक्षा में वास्तविक समानता तब दिखाई देगी जब किसी दिव्यांग विद्यार्थी को विश्वविद्यालय चुनते समय यह चिंता न करनी पड़े कि वहां पहुंचने का रास्ता accessible है या नहीं, पढ़ाई की सामग्री उसके अनुकूल मिलेगी या नहीं और आवश्यकता पड़ने पर संस्थागत सहायता उपलब्ध होगी या नहीं।
30 सितंबर की reporting deadline इसलिए केवल administrative exercise बनकर नहीं रहनी चाहिए। इससे यह समझने का अवसर मिलना चाहिए कि देश के उच्च शिक्षण संस्थान RPwD Act की भावना को जमीन पर कितना लागू कर रहे हैं।
आपके अनुभव में क्या भारत के कॉलेज और विश्वविद्यालय दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए वास्तव में accessible और inclusive हैं? अपनी राय शुभदा शक्ति के साथ साझा करें।
शुभदा शक्ति — दिव्यांगों को दुनिया और दुनिया को दिव्यांगों से जोड़ने की एक पहल।






