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जी, सुना क्या ?? “8 लाख में हमले की डील! पहचान की भूल ने निर्दोष को बनाया निशाना”

8 लाख की सुपारी, लेकिन निशाना बन गया निर्दोष! किशनगढ़ हमले का चौंकाने वाला खुलासा

दो महीने बाद पुलिस ने खोला राज; 245 CCTV कैमरे खंगाले, मुख्य साजिशकर्ता समेत 4 गिरफ्तार

किशनगढ़ (अजमेर)। किशनगढ़ के रूपनगढ़ रोड क्षेत्र में ‘खुशी हैंडीक्राफ्ट’ के संचालक पर हुए जानलेवा हमले और गोदाम में तोड़फोड़ के करीब दो महीने पुराने मामले का अजमेर जिला पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि कथित तौर पर 8 लाख रुपये की सुपारी देकर हमला करवाया गया था, लेकिन हमलावर पहचान में भ्रम के कारण वास्तविक टारगेट की जगह हैंडीक्राफ्ट संचालक गोरधन बलाई पर टूट पड़े।

पुलिस ने मामले में मुख्य साजिशकर्ता सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी को शिनाख्त परेड के लिए बापर्दा रखा गया है।

सुबह-सुबह स्कॉर्पियो से पहुंचे थे हमलावर

घटना 22 जुलाई 2026 को सुबह करीब 8:20 बजे की बताई गई है। मकराना रोड मार्बल एरिया में आरके मार्बल के सामने स्थित खुशी हैंडीक्राफ्ट (बॉर्डर पट्टी गोदाम) में 40 वर्षीय संचालक गोरधन बलाई अपने मजदूर प्रकाश के साथ काम कर रहे थे।

इसी दौरान काले रंग की स्कॉर्पियो वहां पहुंची। आरोप है कि वाहन से लाठी, डंडे, सरिए और लोहे के पाइप लेकर पांच बदमाश उतरे, जबकि कुछ लोग वाहन में ही बैठे रहे। हमलावरों ने पहले मजदूर प्रकाश और फिर गोरधन पर हमला किया। हमले में गोरधन गंभीर रूप से घायल हो गए। आरोपियों ने गोदाम में तोड़फोड़ भी की और इसके बाद वाहन से फरार हो गए।

पीड़ित के भाई बंशी लाल वर्मा की रिपोर्ट पर गांधीनगर थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के साथ धारा 109 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

245 CCTV कैमरों से पुलिस ने जोड़ी कड़ियां

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक, अजमेर रेंज डॉ. रवि और जिला पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देशन में गांधीनगर थानाधिकारी अनिल शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।

जांच के दौरान पुलिस ने करीब 245 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। घटनास्थल के आसपास मोबाइल टावरों का BTS डेटा जुटाया गया और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की CDR तथा संभावित रूट का तकनीकी विश्लेषण किया गया।

करीब दो महीने तक चली जांच के बाद पुलिस ने जयपुर सहित विभिन्न स्थानों पर दबिश देकर संदिग्धों को पकड़ा।

पुराना विवाद बना साजिश की वजह

पुलिस पूछताछ के अनुसार, मुख्य आरोपी सुरेंद्र कुमार उर्फ हरेंद्र डूडी का अपने पूर्व साझेदार के साथ कथित लेनदेन को लेकर पुराना विवाद था। पुलिस का कहना है कि इसी रंजिश के चलते उसने पूर्व साझेदार को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से राजेंद्र घासल उर्फ राजू को कथित तौर पर 8 लाख रुपये की सुपारी दी।

इसके बाद राजेंद्र ने कथित हमले के लिए मुकेश जाट उर्फ सेंटी को तैयार किया। लेकिन वारदात के दिन पहचान में भ्रम हो गया और हमलावरों ने कथित वास्तविक लक्ष्य की जगह गोरधन बलाई पर हमला कर दिया।

मुख्य साजिशकर्ता समेत चार गिरफ्तार

पुलिस ने सुरेंद्र कुमार उर्फ हरेंद्र डूडी (35), मुकेश जाट उर्फ सेंटी (26) और राजेंद्र घासल उर्फ राजू (25) को गिरफ्तार किया है। चौथे आरोपी को शिनाख्त परेड के मद्देनजर बापर्दा रखा गया है।

मामले के खुलासे में गांधीनगर थानाधिकारी अनिल शर्मा के साथ हेड कांस्टेबल राजूराम गुर्जर, कांस्टेबल प्रेमचंद मीणा और गजानंद की विशेष भूमिका बताई गई है।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर वारदात में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश भी दी जा रही है।

नोट: आरोपों और साजिश से संबंधित विवरण पुलिस जांच/पूछताछ में सामने आई जानकारी पर आधारित हैं। आरोपियों के विरुद्ध अंतिम रूप से दोष सिद्ध करने का अधिकार न्यायालय का है।

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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