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जी,सुना क्या ?? “एक शब्द, बड़ा विवाद! NCERT की किताब पर हाईकोर्ट में सवाल”।

NCERT की पहली कक्षा की किताब में ‘बूर’ शब्द पर विवाद, पटना हाईकोर्ट पहुंचा मामला; केंद्र से मांगा जवाब

 पटना / अजमेर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा-1 की हिंदी पाठ्यपुस्तक मेरे‘सारंगी भाग-1’ में शामिल लोकप्रिय बाल कविता ‘चंदा मामा दूर के’ की एक पंक्ति को लेकर विवाद पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है। कविता में प्रकाशित ‘बूर’ शब्द को लेकर दायर जनहित याचिका पर अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

मामला कविता की दूसरी पंक्ति से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यहां ‘पूए पकाए गुड़ के’ होना चाहिए, जबकि पुस्तक में ‘गुड़’ की जगह ‘बूर’ शब्द प्रकाशित है। याचिका में दावा किया गया है कि कुछ स्थानीय बोलियों, विशेषकर बिहार के कुछ क्षेत्रों में इस शब्द का इस्तेमाल आपत्तिजनक अर्थ में किया जाता है। इसी आधार पर बच्चों की पाठ्यपुस्तक में इसके प्रयोग पर आपत्ति जताई गई है।

पटना निवासी सोमित्र शंकर की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की। अदालत ने संबंधित पक्षों से मामले में निर्देश प्राप्त करने और अगली सुनवाई तक संभावित सुधारात्मक उपायों की जानकारी देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।

हालांकि इस विवाद में एक महत्वपूर्ण भाषाई पहलू भी है। अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही शब्द के अलग अर्थ हो सकते हैं। इसलिए किसी शब्द को केवल एक स्थानीय अर्थ के आधार पर परखने के बजाय उसके मानक हिंदी, क्षेत्रीय बोलियों और संदर्भगत प्रयोग को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। फिलहाल हाईकोर्ट ने यह अंतिम निर्णय नहीं दिया है कि पुस्तक में प्रकाशित शब्द आपत्तिजनक है या यह मुद्रण अथवा संपादन संबंधी त्रुटि है। अदालत ने अभी संबंधित पक्षों से जवाब और सुधारात्मक कदमों की जानकारी मांगी है।

यह मामला अब सिर्फ एक शब्द तक सीमित नहीं रह गया है। इसने बच्चों के लिए तैयार होने वाली पाठ्यपुस्तकों की संपादकीय जांच, भाषाई संवेदनशीलता और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर भी चर्चा खड़ी कर दी है। पहली कक्षा के बच्चों की किताब में इस्तेमाल होने वाली भाषा सरल, स्पष्ट और विभिन्न क्षेत्रों के संदर्भ में उपयुक्त हो—इस विवाद ने इस आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है।

अब निगाहें 13 अक्टूबर की सुनवाई और केंद्र व संबंधित संस्थाओं की ओर से अदालत में दिए जाने वाले जवाब पर रहेंगी।

APOORV SEN
Author: APOORV SEN

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