रूह कंपा देने वाला हादसा: कुएं में समा गए चार सगे भाई, एक साथ उजड़ गई पिता की दुनिया
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के विक्रमपुर गांव में दर्दनाक हादसा, 4 से 9 वर्ष के चार मासूम भाइयों की मौत; बिना मुंडेर का पुराना कुआं बना काल

अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी थाना क्षेत्र के विक्रमपुर गांव में एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। खेत की ओर गए एक ही परिवार के चार सगे भाइयों की कुएं में डूबने से मौत हो गई। मृत बच्चों की पहचान देव (9), त्रिदेव (7), महादेव (6) और प्रियंश (4) के रूप में हुई है। चारों बलवीर कुशवाहा के बेटे थे।
खेलने निकले थे चारों भाई
जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह चारों बच्चे घर से खेलने के लिए निकले थे। काफी समय बीतने के बाद भी जब वे घर नहीं लौटे तो उनकी तलाश शुरू की गई। गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर खेत में बने कुएं तक पहुंचने पर हादसे का पता चला। कुएं से चारों बच्चों के शव बरामद किए गए।
कुछ स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, जिस पुराने कुएं में हादसा हुआ, उस पर मुंडेर नहीं थी और वह खेत की जमीन के लगभग बराबर था। प्रारंभिक तौर पर यह आशंका भी जताई गई कि पहले एक बच्चा कुएं में गिरा और उसे बचाने के प्रयास में उसके तीनों भाई भी हादसे का शिकार हो गए। हालांकि घटना की परिस्थितियों की पुलिस जांच की बात कही गई है।
मजदूरी करने गए थे पिता
बच्चों के पिता बलवीर कुशवाहा मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और हादसे के समय काम पर गए हुए थे। बच्चों की मां भी उस समय मायके में थीं। एक साथ चार बेटों की मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे विक्रमपुर गांव में मातम छा गया।
सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे। शवों को चंदेरी सिविल अस्पताल ले जाया गया और पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। प्रशासन ने नियमानुसार राहत राशि उपलब्ध कराने की बात कही है।
खुले कुएं आखिर कब तक बनते रहेंगे मौत का कारण?
चार मासूम बच्चों की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि खेतों और आबादी के आसपास मौजूद खुले तथा बिना सुरक्षा घेरे वाले कुओं को लेकर गंभीर चेतावनी भी है। इस घटना के बाद ऐसे कुओं की पहचान, मजबूत मुंडेर या सुरक्षा घेरा और चेतावनी संकेत जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत एक बार फिर सामने आई है।
शुभदा शक्ति की अपील: बच्चों की पहुंच वाले खुले कुओं, गड्ढों और जलस्रोतों को सुरक्षित करना केवल प्रशासन ही नहीं, समाज और संबंधित भूमि मालिकों की भी साझा जिम्मेदारी है। समय रहते की गई छोटी-सी सुरक्षा व्यवस्था किसी परिवार को ऐसी अपूरणीय त्रासदी से बचा सकती है।






